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'लावारिस कुत्तों का फ़ायदा उठाओ' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आँध्र प्रदेश में पुलिस वालों से कहा गया है कि वे आवारा और लावारिस कुत्तों से दोस्ती करें और उनसे थानों की निगरानी का काम लें. उनका कहना है कि इन कुत्तों को पुलिस थानों पर नक्सलवादियों के संभावित हमले से बचने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. पुलिस महानिदेशक स्वर्णजीत सिंह ने एक पत्र में सभी पुलिस कर्मचारियों से कहा है कि वे इन कुत्तों को खाना खिलाएँ ताकि वे उनसे हिलमिल जाएँ. पत्र में कहा गया है कि इन कुत्तों को दिन भर थाने के परिसर में रखा जाए और रात को छोड़ दिया जाए ताकि वे कोई असामान्य गतिविधि देखें तो भौंक कर संतरियों को आगाह कर दें. पुलिस महानिदेशक ने इस बात पर ख़ास ज़ोर दिया है कि इस क़दम से सरकार पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा.
'तोंद पर भी क़ाबू पाओ' उन्होंने जिलाधिकारियों और अन्य अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि यह कार्रवाई अमल में लाई जाए. हाल ही में गुंतूर ज़िले में एक थाने पर माओवादियों के हमले के बाद पुलिस महानिदेशक ने इस उपाय के बारे में सोचा. इस हमले में सात लोगों की जानें गई थीं जिनमें चार पुलिसकर्मी भी थे. पुलिस महानिदेशक ने कर्मचारियों को एक ताकीद भी की है. उनका कहना है कि वे अपनी 'तोंद' पर क़ाबू रखें क्योंकि उसकी वजह से लगता है कि वे 'भ्रष्ट' हैं. उन्होंने कहा कि ज़रूरी है कि पुलिसवाले देखने में स्मार्ट लगें और इसके लिए उन्हें सिगरेट और शराब से भी परहेज़ करना चाहिए. |
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