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मंगलवार, 25 जनवरी, 2005 को 13:13 GMT तक के समाचार
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भारत में गणतंत्र दिवस पर भारी सुरक्षा
गणतंत्र दिवस परेड
परेड में देश की सैन्य शक्ति का प्रदर्शन होता है
भारत 26 जनवरी, 2005 को अपना 56वाँ गणतंत्र दिवस मना रहा है जिसके लिए भारी सुरक्षा प्रबंध किए हैं.

राजधानी दिल्ली में पच्चीस हज़ार से ज़्यादा सुरक्षा बल तैनात किए जा रहे हैं.

गणतंत्र दिवस की परेड में सैनिक साज़ो-सामान और थलसेना, वायुसेना, नौसेना, अर्द्धसैनिक बलों और पुलिस बल के दस्ते हिस्सा लेते हैं.

गणतंत्र दिवस समारोह में सभी राज्यों से आई रंग बिरंगी झांकियाँ भी निकलती हैं जिन्हें देखने के लिए भारी संख्या में लोग आते हैं.

समारोह में राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, अन्य वरिष्ठ नेता और विदेशी अतिथि हिस्सा लेंगे.

दिल्ली में हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों, दूतावासों और पर्यटन स्थलों पर अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं.

राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड और भारतीय-तिब्बत सीमा पुलिस के 600 से ज़्यादा कमांडो दिल्ली में तैनात किए गए हैं.

बंकर भी

प्रशासन का कहना है कि राजधानी की बहुमंज़िला इमारतों पर भी सुरक्षाकर्मी तैनात किए जा रहे हैं. गणतंत्र दिवस की परेड के रास्ते के साथ-साथ बंकर भी बनाए गए हैं.

भारत के अन्य महानगरों मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में भी गणतंत्र दिवस के अवसर पर व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं.

गणतंत्र दिवस परेड
परेड की छटा देखते ही बनती है

जम्मू कश्मीर राज्य में सुरक्षा बढ़ा दी गई है विशेष रूप से श्रीनगर और जम्मू में जहाँ सरकारी समारोह होंगे.

राज्य सरकार किसी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहती. कुछ दिन पहले ही श्रीनगर के बख़्शी स्टेडियम के पास बने एक स्टेडियम परिसर पर चरमपंथियों ने आत्मघाती हमला किया था.

हर साल बख़्शी स्टेडियम में सरकारी समारोह होता है जिसके आसपास अतिरिक्त पुलिस और अर्द्धसैनिक बल तैनात किए गए हैं.

कश्मीरी चरमपंथी गणतंत्र दिवस समारोह को पहले भी निशाना बनाते रहे हैं. हमेशा की तरह इस बार भी पृथकतावादी संगठनों ने 26 जनवरी को काला दिवस घोषित किया है और लोगों से व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखने का आहवान किया है.

उधर देश के पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश में एक प्रमुख छात्र संगठन ने गणतंत्र दिवस समारोहों का बहिष्कार करने के लिए पृथकतावादी संगठनों का साथ देने का फ़ैसला किया है.

ऑल अरुणाचल प्रदेश स्टूडैंट यूनियन का कहना है कि केंद्र सरकार ने चकमा और हाजॉंग जनजाति के लोगों को राज्य से निर्वासित करने के लिए कोई क़दम नहीं उठाया है.

पूर्वोत्तर राज्यों के छह अन्य पृथकतावादी संगठनों ने भी गणतंत्र दिवस का बहिष्कार करने का आहवान किया है. सभी पूर्वोत्तर राज्यों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है.

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