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गुरुवार, 23 दिसंबर, 2004 को 13:07 GMT तक के समाचार
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नरसिंह रावः जीवन और व्यक्तित्व
नरसिंह राव
नरसिंह राव 1991 से 1996 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे
पी वी नरसिह राव का जन्म 28 जून 1921 को आंध्र प्रदेश के करीमनगर ज़िले के वांगरा गाँव में एक किसान परिवार में हुआ.

नाम तो उनका था पामुलपर्ति वेंकट नरसिंह राव मगर दोस्तों में वे बस 'पी.वी.' के नाम से जाने जाते थे.

उन्होंने ओस्मानिया, बॉम्बे और नागपुर विश्वविद्यालयों में पढ़ाई की और बीएससी और एलएलबी की डिग्रियाँ लीं.

राजनीति के प्रति उनका रूझान 1938 से शुरू हुआ जब उन्होंने निज़ाम सरकार की, कॉलेज में वंदे मातरम के गाने पर लगी पाबंदी के जारी विरोध में हिस्सा लिया.

उनके परिवार में उनकी पत्नी के अलावा तीन बेटे और पाँच बेटियाँ हैं.

राजनीति

नेहरू-गांधी परिवार से उनकी निकटता शुरू से ही रही.

1971 में नरसिंह राव आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बने.

1974 में इंदिरा गांधी ने उन्हें कांग्रेस महासचिव नियुक्त किया और इस पद पर वे तीन साल तक रहे.

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1977 में वे पहली बार लोकसभा के लिए चुनकर आए. भारत में आपातकाल के बाद चली जनता लहर में वे ऐसे बहुत कम कांग्रेसी नेताओं में थे जो लोकसभा चुनाव जीत सके.

1980 के दशक में उन्होंने इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की सरकारों में कई महत्वपूर्ण विभाग सँभाले.

वह संभवतः अकेले ऐसे राजनेता थे जिन्होंने गृह मंत्रालय भी सँभाला, विदेश मंत्रालय भी और रक्षा मंत्रालय भी.

वे केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री भी रहे.

1991 में राजीव गाँधी की हत्या के बाद अचानक उनको प्रधानमंत्री की कुर्सी मिली और फिर 1996 तक उन्होंने कांग्रेस की सरकार चलाई.

भाषाविद

नरसिंह राव का नाता केवल राजनीति से ही नहीं बल्कि साहित्य, भाषा और लेखन से भी रहा.

वे लगभग 17 भाषाओं के जानकार थे और हिंदी, उर्दू, तेलुगु जैसी भारतीय भाषाओं के अलावा स्पेनिश जैसी विदेशी भाषाएँ भी आसानी से बोल-समझ लेते थे.

हिदी में तो उन्हें साहित्य रतन की उपाधि भी मिली थी.

1992 में बाबरी मस्जिद के ढहाए जाने के बाद उन्होंने मुस्लिम नेताओ को ख़ालिस उर्दू में भाषण देकर समझाया तो हिंदू नेताओं के लिए उन्होंने गीता के उद्धरणों के साथ बात रखी.

प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद उन्होंने कोई चुनाव नहीं लड़ा और इस दौरान उन्होंने अपनी जीवनी से मिलता-जुलता एक उपन्यास लिखा - द इनसाइडर.

द इनसाइडर के अनावरण के लिए उन्होंने बुलाया पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को जो राजनीतिक अखाड़े में उनके प्रतिद्वंद्वी होने से अधिक एक कवि के तौर पर उनके मित्र थे.

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