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पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंह राव का निधन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री पी वी नरसिंह राव का गुरूवार को निधन हो गया. 83 वर्षीय नरसिंह राव को दो सप्ताह पहले दिल का दौरा पड़ा था. संसद में नरसिंह राव के निधन की सूचना दिए जाने के बाद दोनों सदनों में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई. उन्हें नौ दिसंबर को दिल का दौरा पड़ा था जिसके बाद उनको दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती कराया गया था. इसी अस्पताल में गुरूवार दोपहर को हृदयगति रूकने से उनका देहांत हो गया. भारत सरकार ने उनके सम्मान में सात दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है. साथ ही उनकी मौत की ख़बर के बाद नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र का भारत दौरा भी रद्द कर दिया गया है. उनके परिवार में पत्नी के अलावा तीन बेटे और पाँच बेटियाँ हैं. सत्ता और उदारीकरण नरसिंह राव ने 1991 से 1996 तक भारत में कांग्रेस सरकार का नेतृत्व किया था. नरसिंह राव सरकार ने ही 90 के दशक में भारत में आर्थिक सुधार और उदारीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण क़दम उठाए थे. भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तब नरसिंह राव सरकार में वित्त मंत्री थे. कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता के तौर पर नरसिंह राव ने 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की हत्या के बाद पार्टी प्रमुख का दायित्व सँभाला था. इसके बाद इसी वर्ष वे प्रधानमंत्री बने. नरसिंह राव विवादों में भी रहे और झारखंड मुक्ति मोर्चा रिश्वत कांड में अदालत ने उन्हें आपराधिक मामले का ज़िम्मेदार ठहराया था. उन पर आरोप था कि उन्होंने जुलाई 1993 में एक अविश्वास प्रस्ताव के दौरान अपनी कॉंग्रेस पार्टी के पक्ष में समर्थन जुटाने के लिए एक क्षेत्रीय दल झारखंड मुक्ति मोर्चा के सदस्यों को भारी धनराशि दी. मगर मार्च 2002 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने नरसिंह राव को आरोपों से बरी कर दिया. |
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