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आसिफ़ ज़रदारी को ज़मानत मिली | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो के पति आसिफ़ अली ज़रदारी को एक न्यायालय ने ज़मानत दे दी है. ज़रदारी को न्यायालय के आदेश पर मंगलवार को इस्लामाबाद में गिरफ़्तार किया गया था. उन्हें सिंध हाई कोर्ट के एक न्यायाधीश और उनके बेटे की 1996 में हुई हत्या के मामले में कराची में एक अदालत के सामने पेश होना था. लेकिन जब वे पेश नहीं हुए तो तो उन्हें गिरफ़्तार करने का आदेश दिया गया था. ज़रदारी को आठ साल की क़ैद के बाद पिछले महीने ज़मानत पर रिहा किया गया था. उन पर भ्रष्टाचार से लेकर हत्या तक के आरोप लगे हुए हैं. हाल ही में ज़रदारी को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने ज़मानत पर रिहा किया था. लेकिन ये मामले सिंध हाई कोर्ट के न्यायाधीश और उनके बेटे की हत्या के मामले से भिन्न हैं. बुधवार को ज़मानत की ख़बर मिलने पर ज़रदारी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, "मैं अल्लाह का शुक्र अदा करता हूँ. अदालतें जाग रही हैं और देश में लोकतंत्र की बहाली में मदद करेंगी." सिंध प्रांत के गृह मंत्री अब्दुल रऊफ़ सिद्दीक़ी ने कहा कि अधिकारी अदालती आदेशों का पालन कर रहे हैं. सिद्दीक़ी ने रॉयटर्स से कहा, "अब जबकि अदालत ने ज़रदारी की ज़मानत मंज़ूर कर दी है तो हम उन्हें रिहा कर देंगे." जानकारों का कहना है कि हालाँकि उन पर मुक़दमे बरक़रार हैं लेकिन उन्हें रिहा करना सरकार की उस योजना का हिस्सा हो सकता है कि वह पारिस्तान के धर्मनिर्पेक्ष विपक्ष से अपना नाता तोड़ लें. लेकिन कुछ अन्य पर्यवेक्षकों का मानना है कि अधिकारी ज़रदारी को हाल के दिनों में मिले समर्थन से भौंचक्के हैं और उन्हें राजधानी से दूर रखना चाहते हैं. ज़रदारी की फिर से गिरफ़्तार किया जाना एक चौंकाने वाली बात थी. अधिकारियों ने कहा है कि यह अदालती मामला है. |
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