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आसिफ़ ज़रदारी फिर गिरफ़्तार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में पुलिस ने पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो के पति आसिफ़ अली ज़रदारी को एक न्यायालय के आदेश पर फिर गिरफ़्तार कर लिया है. उन्हें सिंध हाई कोर्ट के एक न्यायाधीश और उनके बेटे की 1996 में हुई हत्या के मामले में कराची में एक अदालत के सामने पेश होना था. लेकिन जब वे पेश नहीं हो पाए तो उन्हें गिरफ़्तार करने का आदेश दिया गया. उन्हें राजधानी इस्लामाबाद में हिरासत में ले लिया गया है. ज़रदारी का प्रतिनिधित्व कर रहे एक वकील का कहना है कि वे इस फ़ैसले को न्यायालय में चुनौती देंगे. हाल ही में ज़रदारी को पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने ज़मानत पर रिहा किया था. ज़रदारी 1996 से ही जेल में बंद थे और उनपर भ्रष्टाचार और हत्या की साज़िश रचने का आरोप था. लेकिन ये मामले सिंध हाई कोर्ट के न्यायाधीश और उनके बेटे की हत्या के मामले से भिन्न हैं. बदले की भावना इससे पहले ज़रदारी ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को कराची से इस्लमाबाद के लिए पीआईए की उड़ान से रवाना होते हुए कहा, "ये सब राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है." उन्होंने आरोप लगाया, "सरकार मेरी लोकप्रियता से डर गई है. रावलपिंडी में पार्टी के कई कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किया गया है, जहाँ मुझे रैली को संबोधित करना था." रॉएटर्स समाचार एजेंसी का भी कहना था कि ज़रदारी ने उन्हें बताया कि वे इस सब के पीछे सरकार का हाथ देखते हैं. रॉएटर्स का कहना है कि इस्लामाबाद में ज़रदारी के समर्थन में नारे लगा रहे उनके लगभग 500 समर्थकों की पुलिस के साथ झड़प हुई. पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए लाठी चार्ज किया और आँसू गैस छोड़ी. कराची में भी ज़रदारी के सैंकड़ों समर्थकों और पुलिस के बीच झड़पें हुई हैं. 'सदभावना बढ़ेगी' इससे पहले जब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 10 लाख रूपए के मुचलके पर ज़मानत दी थी तो पाकिस्तान सरकार ने अदालत के फ़ैसले पर प्रसन्नता जताई थी. पाकिस्तान के सूचना मंत्री शेख़ राशिद अहमद ने कहा था कि इससे देश में राजनीतिक सदभावना बढ़ेगी. उस समय शेख़ राशिद ने कहा था,"सरकार सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का सम्मान करेगी." दो बार पाकिस्तान की प्रधानमंत्री रह चुकीं बेनज़ीर भुट्टो ने भी ज़रदारी की रिहाई का स्वागत किया था. वे अपने तीन बच्चों के साथ संयुक्त अरब अमीरात और लंदन में निर्वासन का जीवन गुज़ार रही हैं. 1990 और 1996 में कथित भ्रष्टाचार के आरोप के कारण बेनज़ीर की सरकार को बर्ख़ास्त कर दिया गया था. |
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