|
ज़मानत पर फ़ैसला सुरक्षित रखा गया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मद्रास हाईकोर्ट ने कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती की ज़मानत याचिका पर फ़ैसला सुरक्षित रखा है. अदालत ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि फ़ैसला कब सुनाया जाएगा. शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती न्यायिक हिरासत में हैं और वेल्लूर की एक जेल में रखे गए हैं. उन पर कांची पीठ के एक कर्मचारी की हत्या में शामिल होने का आरोप है. तीन महीने पहले तमिलनाडु में कांची पीठ के एक अधिकारी शंकर रामन की हत्या कर दी गई थी. उन्हें 11 नवंबर की आधी रात को तमिलनाडु की पुलिस ने पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश के महबूबनगर ज़िले में उनको गिरफ़्तार किया था. इस बीच कांचीपुरम की एक अदालत में चल रहे एक अन्य मामले में अदालत ने गुरुवार को कोई फ़ैसला नहीं सुनाया. कांचीपुरम की अदालत इस बात पर विचार कर रही है कि क्या शंकराचार्य को पूछताछ के लिए पुलिस की हिरासत में भेज दिया जाए. तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने कहा है कि कांची कामकोटी पीठ के कर्मचारी की हत्या के मामले में शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती के ख़िलाफ़ 'पुख्ता सुबूत' हैं. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||