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काबुल आत्मघाती हमले से दहला | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में एक लोकप्रिय बाज़ार चिकन स्ट्रीट में शनिवार को एक आत्मघाती हमला हुआ जिसमें कम से कम सात लोग घायल हो गए. घायलों में तीन अंतरराष्ट्रीय शांति सैनिक भी हैं और समझा जाता है कि हमले का निशाना शांति सैनिक ही हैं. बीबीसी संवाददाता एंड्रयू नोर्द वहाँ मौजूद थे. उनका कहना है कि हमला स्थानीय समय के मुताबिक़ क़रीब साढ़े तीन बजे यानी ग्रीनिच मानक समय के अनुसार ग्यारह बजे हुआ. नोर्द का कहना है कि आत्मघाती हमलावर का शव स्ट्रीट पर पड़ा देखा गया है. इस्लामी तालेबान आंदोलन के एक प्रवक्ता ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली है. उधर काबुल में उत्तर अटलांटिक संधि संगठन नैटो के नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय सेना के एक प्रवक्ता ने कहा कि एक शांति सैनिक गंभीर रूप से घायल हुआ है. प्रवक्ता ने घायल शांति सैनिक के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं दी. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस साल जनवरी के बाद से काबुल में यह पहला आत्मघाती हमला है. तालेबान के एक प्रवक्ता मुफ़्ती लतीफ़ुल्लाह हकीमी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, "तालेबान काबुल में हुए आत्मघाती हमले की ज़िम्मेदारी लेता है...हम ऐसे और भी हमले करेंगे." अफ़रा-तफ़री घटनास्थल पर मौजूद लोगों का कहना है कि सैनिकों ने अपना वाहन एक कालीन की दुकान के बाहर खड़ा किया ही था कि उनकी तरफ़ एक आदमी बढ़ता नज़र आया. तब उसने एक के बाद एक हथगोलों से हमला किया और ऐसा करते वक़्त वह ज़ोर ज़ोर से चिल्ला भी रहा था. उसने इन हमलों में ख़ुद को भी मार लिया. बस कुछ ही क्षण में ज़मीन पर और दुकान में ख़ून ही ख़ून नज़र आने लगा. सड़क पर कुछ अनफटे हथगोले भी पड़े हुए देखे गए. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस घटना के बाद यह आशंका बढ़ने लगी है कि कहीं यह सरकार विरोधी चरमपंथियों का नया हिंसा अभियान तो नहीं है. |
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