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संघ के समारोह में आडवाणी भी पहुँचे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राष्ट्रीय स्वयं संघ के प्रमुख केएस सुदर्शन ने कहा है कि केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार को दरअसल वामपंथी दल चला रहे हैं. महत्वपूर्ण बात ये थी कि नागपुर में संघ के स्थापना दिवस समारोहों में भारतीय जनता पार्टी के नए अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी भी मौजूद थे. भाजपा के किसी अध्यक्ष ने दस साल बाद संघ के इस समारोह में भाग लिया है. जानकारों का कहना है कि आडवाणी के इस समारोह में शामिल होने का संदेश साफ़ था कि भाजपा संघ की अनदेखी नहीं कर सकती. जब से केंद्र में भाजपा की हार हुई है तब से संघ परिवार बार-बार कहता रहा है कि पार्टी की हार की एक प्रमुख वजह ये रही है कि उसने हिंदुत्व के एजेंडे की अनदेखी की है. आडवाणी ने संघ प्रमुख सुदर्शन से भी क़रीब एक घंटे की मुलाक़ात की और समझा जाता है कि सुदर्शन ने भाजपा अध्यक्ष से पार्टी में नए चेहरों को जगह देने के लिए कहा. 'साज़िश' सुदर्शन ने संघ के स्थापना दिवस के मौक़े पर वामपंथी दलों को सरकार में पिछली सीट पर बैठा चालक बताते हुए कहा कि वे दल हिंदूवादी ताक़तों को नुक़सान पहुँचाने की साज़िश रच रहे हैं. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार सुदर्शन ने कांग्रेस का तो नाम नहीं लिया लेकिन कहा कि "मार्क्सपुत्र(वामपंथी) और अंग्रेज़ी शिक्षित तबका" ही ख़ासतौर से संघ का विरोधी है. उन्होंने कहा, "इत्तेफ़ाक है कि आज वे सरकार में पिछली सीट पर बैठकर ड्राइविंग करने की स्थिति में हैं इसलिए वे हिंदूवादी ताक़तों को नुक़सान पहुँचाने के लिए साज़िशें रच रहे हैं." सुदर्शन ने लोकसभा और महाराष्ट्र चुनाव के नतीजों का तो कोई ज़िक्र नहीं किया लेकिन भाजपा को उसके उस वादे के लिए आड़े हाथों लिया कि उसने लोक सभा चुनाव से पहले दो लाख उर्दू अध्यापक नियुक्त करने का वादा कर डाला था. संजय गाँधी और मेनका गाँधी के पुत्र वरुण गाँधी ने भी इस समारोह में भाग लिया और उनकी मौजूदगी ख़ासी दिलचस्पी की नज़र से देखी गई. |
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