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मंगलवार, 12 अक्तूबर, 2004 को 12:17 GMT तक के समाचार
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अभिनेत्रियाँ और मॉडल कर रही हैं देह व्यापार?

टीवी कार्यक्रम का एक दृश्य
कार्यक्रम बनाने वालों का दावा है कि यह एक फ़िल्म की अभिनेत्री है जो लाखों के सौदे के बाद होटल में पहुँचीं थीं
भारत के एक टेलीविज़न चैनल पर इन दिनों दिखाए जा रहे एक कार्यक्रम की बड़ी चर्चा हो रही है कि यह देह व्यापार पर 'तहलका' जैसा मामला है.

इस कार्यक्रम में दिखाया गया है कि बॉलीवुड की कई कथित अभिनेत्रियाँ और मशहूर मॉडल देह व्यापार में लिप्त हैं.

इस कार्यक्रम को बनाने के लिए पत्रकारों ने ग्राहकों के रुप में कई कथित मॉडलों और अभिनेत्रियों से सौदेबाज़ी की और उसे छिपे हुए कैमरे में क़ैद कर लिया.

इस कार्यक्रम की बहुत चर्चा हो रही है लेकिन मीडिया समीक्षक सुधीश पचौरी मानते हैं कि यह दर्शक खींचने के टेलीविज़न चैनलों की खींचतान का ही एक नमूना है.

दिल्ली से मुंबई तक

स्टार टीवी पर अपराध और अपराधियों पर दिखाए जाने वाला कार्यक्रम 'रेड अलर्ट' पिछले दो हफ़्तों से वेश्यावृत्ति पर केंद्रित रहा है.

टीवी कार्यक्रम का एक दृश्य
इस लड़की को मशहूर मॉडल कहा गया है

शनिवार को प्रसारित होने वाले कार्यक्रम में पहले दिखाया गया था कि किस तरह दिल्ली के संभ्रांत घरों की लड़कियाँ भी अपने खर्चों के लिए देह व्यापार करने लगी हैं.

इसके बाद रेड अलर्ट के संवाददाताओं ने मुंबई में कथित तौर पर कई बड़ी माडलों और बॉलीवुड की अभिनेत्रियों को होटलों के कमरे में बुलाया और उनसे मुंबई में इस धंधे के बारे में खुली बात की.

कार्यक्रम बनाने वालों ने कैमरे में क़ैद लड़कियों के चेहरे और उनकी पहचान ज़ाहिर नहीं की है लेकिन यह दावा किया है कि उनमें से एक किसी मशहूर टैल्कम पाउडर की मॉडल हैं तो दूसरी को फ़िल्म अभिनेत्री बताया गया है जो शाहरूख ख़ान की किसी फ़िल्म में काम कर चुकी हैं.

कार्यक्रम के अनुसार संवाददाता इन मॉडलों और अभिनेत्रियों के पास विभिन्न वेबसाइटों पर उपलब्ध जानकारियों के आधार पर दलालों से संपर्क करके पहुँचे.

रेड अलर्ट का दावा है कि लाखों के सौदे के बाद होटल में नकली ग्राहक बनकर बैठे संवाददाता के पास आई अभिनेत्री के बारे में अगले हफ़्ते के कार्यक्रम में और विवरण देंगे.

सबूत के लिए

हालांकि इस कार्यक्रम में ऐसा कुछ नहीं दिखाया गया जिसके बारे में लोग आमतौर पर नहीं जानते थे, फिर यह कार्यक्रम क्यों?

अजीत अंजुम
अजीत अंजुम मानते हैं कि कार्यक्रम का मक़सद पूरा हो रहा है

इसके जवाब में 'रेड अलर्ट' बनाने वाली कंपनी 'बीएजी फ़िल्म्स' के संपादकीय प्रमुख अजीत अंजुम कहते हैं,"जहाँ तक जानने का सवाल है तो बहुत लोग बहुत कुछ जानते हैं, रिश्वतखोरी है, अफ़सर पैसे लेते हैं राजनीतिज्ञ पैसे लेते हैं ज़रुरत है उसको सामने लाने की, और जब आप इसे सामने लाते हैं तो स्टोरी होती है.यही बात जिस्मफ़रोशी के साथ भी लागू होती है तो लोगों को अंदाज़ा था कि इसमें मॉडल होंगी और अभिनेत्रियाँ होंगी लेकिन उसे सबूत के रुप में सामने लाना ज़रुरी था."

अजीत अंजुम इस बात से इनकार करते हैं कि उनके ऊपर टेलीविज़न चैनलों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा का दबाव था. वे कहते हैं कि बात तो दिल्ली में मसाज पार्लरों के विज्ञापनों को देखकर एक छोटी कहानी बनाने की योजना से शुरू हुई थी लेकिन जब काम करना शुरू किया तो मामला गहराता ही गया और फिर मामला मुंबई और अभिनेत्रियों तक पहुँच गया.

उनका कहना है कि स्टार टीवी के प्रमुख उदयशंकर ने इसके लिए अपनी सहमति दी.

टीवी कार्यक्रम का एक दृश्य
नकली ग्राहक बनकर होटलों में सौदा किया गया

मॉडलों और अभिनेत्रियों का नाम और चेहरा नहीं दिखाने के बारे में उनका कहना है कि पहले तो विचार किया गया था कि उनके नाम और पहचान दोनों को ज़ाहिर किया जाएगा लेकिन एक टीवी चैनल होने के नाते एक सामाजिक ज़िम्मेदारी आ रही है और दबाव भी बहुत है.

वे कहते हैं, "कई लड़कियों के पुलिस कमिश्नर को फ़ोन आए हैं कि अगर उनका चेहरा दिखाया गया तो वे आत्महत्या कर लेंगी. फिर हमने सोचा कि हमारा मक़सद कुछ नाम और उनके चेहरे दिखाना नहीं है बल्कि इस बुराई को उजागर करना है. तो फिर हमने इसे छिपा दिया."

लेकिन क्या वेबसाइट के पते बताना भी ज़रुरी था, "हमने जिन वेबसाइट के पते बताए वे कार्यक्रम के प्रसारण के बाद बंद हो गए, तो हम अपने मक़सद में तो कामयाब हुए."

अधिकार नहीं

लेकिन मीडिया समीक्षक सुधीश पचौरी इस कार्यक्रम को विशुद्ध रुप से टेलीविज़न चैनलों के बीच दर्शक खींचने की बढ़ती प्रतिस्पर्धा का परिणाम बताते हैं.

 ठीक है कि वेश्यावृत्ति अच्छा नहीं है लेकिन यह टेलीविज़न चैनलों के लिए कोई समाज शास्त्रीय अध्ययन का विषय नहीं है और उन्हें इस बात का कोई अधिकार नहीं है कि वो अपनी मर्ज़ी से इस काम में लगी किसी लड़की के बारे में ऐसी कहानी बनाए. यह तो पसंद की आज़ादी का सवाल है
सुधीश पचौरी

वे कहते हैं कि इसके अलावा दो तत्व और हैं जिसके कारण इस तरह के कार्यक्रम बनते हैं.

वे कहते हैं, "एक तो यह कि इसके पीछे कस्बाई और प्रतिक्रियावादी सोच है दूसरे समाज के उच्चवर्गीय तबके के लिए समाज में मौजूद एक ख़ास तरह की घृणा है. नताशा सिंह की आत्महत्या और जसिका लाल की हत्या के मामले में भी मीडिया के व्यवहार से यही ज़ाहिर हुआ."

सुधीश पचौरी कहते हैं कि उच्चवर्गीय समाज में हो रहे किसी भी पतन को लिए पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव कहा जाता है.

उनका कहना है, "ठीक है कि वेश्यावृत्ति अच्छा नहीं है लेकिन यह टेलीविज़न चैनलों के लिए कोई समाज शास्त्रीय अध्ययन का विषय नहीं है और उन्हें इस बात का कोई अधिकार नहीं है कि वो अपनी मर्ज़ी से इस काम में लगी किसी लड़की के बारे में ऐसी कहानी बनाए. यह तो पसंद की आज़ादी का सवाल है."

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