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राष्ट्रगान से 'सिंध' शब्द हटाने से इनकार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रगान से 'सिंध' शब्द हटाकर उसकी जगह 'कश्मीर' शब्द जोड़ने संबंधी एक याचिका ख़ारिज कर दी है. याचिका में कहा गया था कि जब सिंध पाकिस्तान में है तो उसका गुणगान क्यों किया जाए और उसकी जगह कश्मीर शब्द जोड़ दिया जाए. मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरसी लाहोटी, न्यायमूर्ति जीपी माथुर और न्यायमूर्ति पीपी नाओलेकर की खंडपीठ ने इस जनहित याचिका को ख़ारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता अगर चाहे तो इस मामले पर केंद्र सरकार का ध्यान आकृष्ट कर सकते हैं. याचिकाकर्ता संजीव भटनागर का कहना था कि देश की भौगोलिक स्थिति के अनुसार राष्ट्रगान में परिवर्तन किया जा सकता है. इस बारे में उन्होंने इस विषय पर हुई संविधान सभा की बहस का भी उल्लेख किया. याचिकाकर्ता ने कहा कि राष्ट्रगान में सिंध शब्द का इस्तेमाल न सिर्फ़ पाकिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन है बल्कि इससे 100 करोड़ भारतीयों की भावनाओं को भी चोट पहुँचती है. इस बारे में उच्चतम न्यायालय का कहना था कि संविधान सभा के प्रस्ताव के अनुसार राष्ट्रगान में परिवर्तन का अधिकार केवल संसद को ही है इसलिए इस बारे में केंद्र सरकार से संपर्क किया जाना चाहिए. |
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