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मर्द भी हैं देह व्यापार के बाज़ार में | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
खरीदार पुरुषों और जिस्म बेचती महिलाओं वाले पेशे को ही वेश्यावृत्ति कहने के दिन अब गए, अब इस परिभाषा में तब्दीली आ रही है क्योंकि अब इस पेशे में मर्द भी उतर चुके हैं. इस नए ज़माने में ख़रीदार पुरुष या महिला, कोई भी हो सकता है. महानगरों की चकाचौंध भरी ज़िंदगी और उपभोक्तावादी बाज़ार में अपनी जगह बनाने की कोशिश में पुरुष भी अपने दाम लगवाने से पीछे नहीं रहते. ग्राहक चाहे कोई भी हो, असली चीज़ तो पैसा है और कुछ लोगों के लिए पैसा पाने के लिए ज़िस्म एक बेहतर ज़रिया बनकर सामने आया है. कम-से-कम दिल्ली में पिछले दिनों पुस्किन चंद्रा और उसके कथित सहयोगी यौनकर्मी की हत्या ने इस सवाल को और हवा दी है और साथ ही पुरुष वेश्यावृत्ति व समलैंगिकता के सवाल पर गरमागरम बहसों का दौर भी चल रहा है. इस पेशे से जुड़े एक पुरुष यौनकर्मी बताते है,"अगर ग्राहक हमउम्र हो तो काफी 'इंज्वॉय' करते हैं. हाँ, ज़्यादा उम्र के ग्राहकों के साथ हम मन मारकर हमबिस्तर होते हैं. उस समय मक़सद पैसा ही होता है." अपना नाम न बताने की शर्त पर वे कहते हैं,"हमारे यहाँ कई तरह के ग्राहक आते हैं. इनमें कई वकील, डॉक्टर, प्रोफ़ेसर वगैरह हैं जिनसे हमारे शारीरिक संबंध हैं." बढ़ता धंधा ज़ाहिर है, भले ही यह वृत्ति भारतीय समाज के गले न उतरती हो, पर ऐसे तमाम लोग हैं जो इस पेशे का लुत्फ़ उठाने और अपनी शारीरिक भूख को शांत करने के लिए ऐसे पुरुष यौनकर्मियों के पास पहुँचते हैं. यही वजह है कि यह धंधा परदे के पीछे ही सही, बड़ी तेजी से फल-फूल रहा है. एक सर्वेक्षण के मुताबिक केवल दिल्ली में इस समय तीन से चार हजार पुरुष यौनकर्मी हैं. इनके अलावा एक बड़ी तादाद उनकी भी है जो मौज-मस्ती या पैसे के लिए पेशे में तो हैं पर सामने नहीं आते. डेवलपमेंट एडवोकेसी एंड रिसर्च ट्रस्ट के संयोजक संदेश सिंह बताते है,"आज यह पेशा पैसे कमाने का एक अच्छा ज़रिया बन गया है. एक रात में ही ये लोग 10-12 हज़ार तक कमा लेते हैं." "ग़रीबी के चलते तो लोग इस पेशे में आते ही हैं पर दूसरी बड़ी वजह यह भी है कि मस्ती के साथ बिना किसी दबाव, अनुशासन या बंदिश वाला धंधा होने के चलते युवा इस ओर आकर्षित हो रहे हैं." समाज बनाम समलैंगिक एक सर्वेक्षण के मुताबिक अधिकतर यौनकर्मी समलैंगिक हैं. भारतीय समाज और कानून, दोनों की ही नज़र में समलैंगिकता अपराध है और वे इसकी मान्यता नहीं देते. एक यौनकर्मी बताते हैं,"मैं इस पेशे में हूँ, इसकी जानकारी मेरे घर वालों तक को नहीं है. अगर घर और समाज के लोगों को पता चल जाता है तो वो मुझे निकाल बाहर करेंगे." पिछले दिनों ऐसे विषयों पर बनी फ़िल्मों को प्रदर्शित कर रहे सिनेमाघरों में तोड़फोड़ की गई और तमाम जगहों पर प्रदर्शन किए गए जिससे समाज के नज़रिए का अंदाज़ा मिलता है. यही वजह है कि इस पेशे से जुड़े तमाम यौनकर्मी भी सामाजिक बहिष्कार और विरोध से डरते है. |
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