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छत्तीसगढ़ में आदिवासियों का उग्र विरोध | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 55 किलोमीटर दूर सुहेला में पुलिस हिरासत में एक आदिवासी युवक की मौत के विरोध में प्रदर्शन कर रहे आदिवासियों ने थाने पर पथराव किया है और पुलिस की गाड़ियाँ जला दी हैं. इसके बाद पुलिस ने आस-पास के गाँवों में प्रदर्शनकारी आदिवासियों को ढूंढ़-ढूंढ़कर घर से निकाला और उनकी जमकर पिटाई की है. पुलिस ने घटनास्थलों पर मौजूद पत्रकारों को बंदूक दिखाकर दूर चले जाने को कहा. स्थानीय पत्रकार रुचिर गर्ग के अनुसार एक पखवाड़े पहले सुहेला थाने में पुलिस हिरासत में एक आदिवासी युवक रामकुमार की मौत हो गई थी. आदिवासियों का आरोप था कि उसकी मौत पुलिस की पिटाई से हुई. आदिवासियों के विरोध के बाद न्यायिक जाँच के आदेश हुए थे. लेकिन इस बीच एक स्वयंसेवी संस्था एफ़एफ़डीए ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी और इसके बाद रामकुमार का दोबारा पोस्टमॉर्टम हुआ. पोस्टमॉर्टम की दूसरी रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई कि मौत से पहले उसकी पिटाई हुई थी. मंगलवार को आसपास के गाँवों से दो-ढाई हज़ार आदिवासी इकट्ठे होकर थाने के पास प्रदर्शन कर रहे थे. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना हैं कि पुलिस ने इन आदिवासियों पर लाठी बरसाई और इसके जवाब में आदिवासियों ने पथराव शुरु कर दिया. जैसा कि घटना स्थल पर मौजूद पत्रकार रुचिर गर्ग ने बताया आदिवासियों ने इसके बाद पुलिस थाने के बाहर खड़ी कई गाड़ियाँ जला दीं. इनमें कुछ जीपें हैं और कई मोटरसाइकिलें. उनका कहना है कि इसके बाद रायपुर से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया और फिर प्रदर्शनकारी आदिवासियों को घर से निकालकर पीटा गया. दोपहर को हुई इस घटना के बाद पुलिस ने सुहेला में कर्फ़्यू जैसा माहौल बना रखा था और पत्रकारों को वहाँ नहीं जाने दिया जा रहा था. रात तक वहाँ तनाव का माहौल था. |
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