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ओझा ढूँढ़ रहे हैं गावों में चुड़ैलें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वैज्ञानिक राष्ट्रपति अब्दुल कलाम के देश और डॉक्टर मुख्यमंत्री रमन सिंह के प्रदेश में लोग अब भी मानते हैं कि हमारे आसपास रहने वाली महिलाओं में से कुछ डायन या चुड़ैल हो सकती हैं. छत्तीसगढ़ में ऐसी महिलाओं की तलाश के लिए बाक़ायदा हवन पूजन हो रहा है और वह भी प्रदेश सरकार की जानकारी में. जहां यह आयोजन हो रहा है वहाँ गांव के लोगों ने ओझाओं की सहायता से कथित रुप से जादू-टोना करके लोगों को मारने वाली दो महिलाओं की पहचान भी कर ली है. इस अंधविश्वास बढ़ाने वाले आयोजन को बंद करने के लिए सरकार ने तो कुछ किया नहीं लेकिन एक सामाजिक संस्था ने इसके ख़िलाफ़ बिलासपुर हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है. तमाशबीनों का मेला इन ओझाओं को छत्तीसगढ़ में बैगा कहा जाता है. छत्तीसगढ़ की ऊर्जाधानी के नाम से मशहूर कोरबा शहर से सटे हुए सिलियारीभांटा गांव में इन दिनों मेले जैसा माहौल है.
आस-पास के इलाके से हज़ारों लोग यहां कथित रुप से जादू-टोना कर गांव के छह लोगों को मारने वाली टोनही महिला को दी जाने वाली सज़ा को देखने के लिए इकट्ठे हुए हैं. लगभग ग्यारह सौ लोगों की आबादी वाले गांव में पिछले दो महीने में चार लोगों की मौत हो गई और कुछ लोग बीमार पड़ गए. गांव के कुछ लोगों के हाथ-पैर अकड़ने लगे. इसके बाद गांव वालों ने पंचायत में बैठ कर यह निष्कर्ष निकाला कि गांव पर भूत-प्रेत का साया है. गांववालों का यह अंधविश्वास तब और बढ़ गया, जब गांव का एक आदमी कथित तौर पर डॉक्टर के इलाज के बाद भी ठीक नहीं हुआ. आंगनबाड़ी की कार्यकर्ता रमादेवी कहती हैं, " डॉक्टर के इलाज के बाद वह झाड़-फूंक करने वाले बैगा के पास गया और बैगा ने उसे ठीक कर दिया." इस घटना के बाद तय हुआ कि गांव में कुछ बड़े बैगाओं यानी ओझाओं को बुलाया जाए और गांव में जादू-टोना करने वाली टोनही महिला की तलाश कर उसे सज़ा दी जाए. पूरे आयोजन का जिम्मा गांव के उप सरपंच रामलाल टंडन ने लिया. इस काम के लिए सिलियारीभांटा के हर घर से एक-एक सौ रुपए लिए गए और रायगढ़ ज़िले से 13 बैगाओं के एक दल को बुलाया गया. तामझाम पूरा अब पिछले हफ्ते से वहां बैगा अपने पूजा पाठ में लगे हुए हैं. तामझाम और नाटक पूरा है.
आयोजन स्थल पर सैकड़ों लोगों की भीड़ के बीच बैगा, गांव के पुरुष और कुछ स्त्रियां झूम-नाच रही हैं. तांत्रिक बैगाओं का दल समय-समय पर पारंपरिक हथियार लेकर गांव में जगह-जगह घूम-घूम कर कथित टोनही द्वारा ज़मीन में गाड़ी गयी मानव हड्डियों की तलाश कर रहा है. शनिवार को 13 बैगाओं ने निर्वस्त्र होकर गांव की हर सड़क, हर गली में नृत्य किया. इसके बाद बैगाओं के मुखिया गौरीशंकर ने गांव की दो महिलाओं लक्ष्मी और बेंदरकोनहीन को गांव में हो रही मौत का ज़िम्मेदार ठहरा दिया. कुछ लोगों ने तय किया कि इन महिलाओं को पकड़ कर पूजा स्थल पर लाया जाए. इसके बाद इन्हें सज़ा दी जाएगी. लेकिन जब तक गांव वाले इनके घरों तक पहुंचते, दोनों महिलाएं गांव से भाग चुकी थीं. अब इनके घरों में ताला लटक रहा है.
अब तक 26 गांवों में सैकड़ों विभिन्न प्रजातियों के भूत पकड़ने का दावा करने वाले बैगाओं के मुखिया गौरीशंकर का दावा है कि उन्होंने दो भूतों को आज पकड़ा है और उसे गांव के तालाब में शांत किया है. गौरीशंकर कहते हैं-“गांव पर जादू-टोना और भूतों का प्रकोप है. मैं आज कुछ और भूत पकड़ कर इस गांव को भूतों के चंगुल से मुक्त कराउंगा.” हालांकि गांव के कुछ लोग इसे पारंपरिक पूजा का एक अंग मान रहे है लेकिन लक्ष्मी और बेंदरकोनहीन के बारे में कोई कुछ भी नहीं बोलना चाहता. गांव के एक युवक का दावा है कि कल की पूजा के बाद बैगा गांव में जादू-टोना करने वाली कुछ और औरतों को सामने आने पर मजबूर कर देंगे. उसके बाद उसे सज़ा भी दी जाएगी. कथित टोनही को क्या सज़ा मिलेगी, इसका जवाब किसी के पास नहीं है. ज़ाहिर है, छत्तीसगढ़ में ऐसे मामलों में दिए जाने वाली सज़ाओं से यह अलग नहीं होगा-गांव निकाला, अर्थदंड, सामाजिक बहिष्कार, गाँव में निर्वस्त्र घुमाना या फिर इससे भी कुछ गंभीर. प्रशासन चुप इस पूजा-पाठ की सूचना प्रशासन को भी है लेकिन कोई भी अंधविश्वास में डूबे गांव वालों को समझाने-बुझाने नहीं आया. कलेक्टर गौरव द्विवेदी ने प्रशासन के हस्तक्षेप को लेकर कहा- “प्रशासन मुस्तैद है और किसी भी अप्रिय घटना की कोई सूचना नहीं है. गांव के लोग अपनी पूजा-पाठ कर रहे हैं तो उसमें हम कुछ नहीं कर सकते.” दो दिन पहले ही बारिश के लिए महायज्ञ को लेकर चर्चा में आए राज्य के कृषि मंत्री ननकी राम कंवर इसी गांव के बाहर मिल गए. कंवर की प्रतिक्रिया थी- “वरुण महायज्ञ को लेकर तो लोग मेरी प्रशंसा ही कर रहे हैं. मंत्र में ताक़त होती है और सिलियारीभांटा में जो कुछ हो रहा है, वह मंत्र शक्ति द्वारा गांव में टोना-टोटका को दूर करने के लिए किया जा रहा है. इसमें कुछ भी ग़लत नहीं है.” मुख्य बैगा गौरीशंकर और उनके साथियों के अनुसार इसके बाद वे पास के गांव में भी भूत तलाश करने का ऐसा आयोजन शुरु करेंगे. जनहित याचिका इस पूरे आयोजन को लेकर एक सामाजिक संस्था 'फ़ैक्ट फाइंडिंग डॉक्यूमेंटेशन एंड एडवोकेसी' ने बिलासपुर हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है. फ़िलहाल हाईकोर्ट इस याचिका पर विचार कर रही है. इस याचिका में इस तरह के आयोजन को रोकने की बात तो की ही गई है साथ ही किसी भी महिला को कथित रुप से टोनही बताने के ख़िलाफ़ क़ानून बनाने की भी बात कही गई है. इस मामले की सुनवाई जब होगी तब होगी इन पंक्तियों के लिखे जाने तक तो बैगा हो सकता है कि दूसरे गाँव की ओर कूच कर चुके हों और वहाँ भी उसी जोरशोर से टोनही यानी चुड़ैलें तलाश रहे हैं. |
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