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पाँच साल चलेगी सरकार: एबी बर्धन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी(सीपीआई) के महासचिव एबी बर्धन ने कहा है कि कांग्रेस की कुछ नीतियों से सहमत नहीं होने के बावजूद वामपंथी दल उसकी अगुआई वाली केंद्र सरकार को गिरने नहीं देंगे. बीबीसी हिंदी सेवा के फ़ोन-इन कार्यक्रम आपकी बात बीबीसी के साथ में सवालों के जवाब देते हुए उन्होंने कहा, "हम सिर्फ इतना भर चाहते हैं कि केंद्र की यूपीए सरकार बढ़िया से काम करे. हमने सरकार को भरोसा दिला रखा है कि वामपंथी दल सरकार को नहीं गिराएँगे. और इसी कारण हमने समन्वय समिति बनाने का क़दम उठाया ताकि आपसी समझ बढ़े." बर्धन ने आगे कहा, "हम सरकार को गिरने नहीं देंगे, इसका ये मतलब नहीं है कि हम सब कुछ स्वीकार लेंगे. (विभिन्न मुद्दों पर) हमारे अपने मत हैं...लेकिन सरकार को कोई ख़तरा नहीं है." भाजपा पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा, "जो सरकार के गिरने का इंतज़ार कर रहे है, मैं बता दूँ कि उन्हें निराशा ही हाथ लगेगी. ऐसे लोगों को मेरी सलाह है कि वे धैर्य पूर्वक अगले पाँच साल तक सरकार गिरने का इंतज़ार करें. और मेरी राय तो यह भी होगी कि वे विपक्ष के कामकाज़ को बढ़िया से सीखें क्योंकि संभव है पाँच साल बाद भी यूपीए की सरकार ही केंद्र मे रहे."
इस ओर इशारा किए जाने पर कि आर्थिक नीतियों पर सरकार वामपंथी दलों की बात नहीं सुन रही, सीपीआई नेता ने कहा, "अभी तो हमारे रिश्ते की शुरुआती ही हुई है. आने वाले दिनों में और बैठकें होंगी, दोनों तरफ़ से दबाव बनाने के और प्रयास होंगे." बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने के सरकार के फ़ैसले के बारे में उन्होंने कहा, "यदि बीमा क्षेत्र में विदेश निवेश की सीमा बढ़ाने के लिए सरकार को संसद में एक विधेयक लाना होगा. और ऐसा कोई विधेयक हमारे समर्थन के बिना पास होने वाला नहीं, क्योंकि भाजपा ने विधेयक को समर्थन देने का आश्वासन नहीं दिया है." दूरसंचार के क्षेत्र में विदेश निवेश उन्होंने कहा, "हमारे साझा न्यूनतम कार्यक्रम में इस बात का ज़िक्र है कि विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाई जा सकती है. हमें इस पर कोई आपत्ति नहीं है. देखिए दूरसंचार सेक्टर एक संवेदनशील क्षेत्र है, यह देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा से जुड़ा है और दूरसंचार के माध्यमों पर देश का पूरा नियंत्रण होना चाहिए....और दूरसंचार क्षेत्र में विदेश निवेश की सीमा 74 प्रतिशत कर दिए जाने पर किसी अकेली बड़ी कंपनी का इस पर नियंत्रण होने की आशंका रहेगी."
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार को सोनिया गाँधी की कठपुतली सरकार बताए जाने के बारे में एक सवाल के जवाब में बर्धन ने कहा, "भाजपा के पास कहने को कुछ रहा ही नहीं है...वास्तविकता तो ये है कि सोनिया गाँधी सरकार के कामकाज़ में कोई दखल नहीं दे रही, लेकिन साथ ही इस बात को याद रखा जाना चाहिए कि वो यूपीए की सबसे बड़ी पार्टी की नेता हैं." उन्होंने कहा, "जब हमें सरकार के मसले पर बात करनी होती है हम प्रधानमंत्री से मिलते हैं. लेकिन जब हमें महाराष्ट्र के विधान सभा चुनाव पर बात करनी होगी तो हमें सोनिया गाँधी से ही बात करनी होगी." |
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