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भुलक्कड़ लोगों के लिए वरदान टैक्सी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दरवाजा खोलते ही आवाज़ आएगी स्वागतम्. फिर अंग्रेज़ी में कहा जायेगा 'यू आर वेलकम'. सफ़र शुरू होने के कुछ देर बाद आवाज़ आएगी टैक्सी का नंबर नोट कर लें और अपने सामान का ध्यान रखें. सफ़र ख़त्म होने के बाद आवाज़ आएगी, 'अपना सामान लेना न भूलें'. बात करने वाली ये टैक्सियाँ अब पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता की सड़कों पर दौड़ रही हैं. इन टैक्सियों में 'यात्री संबोधन प्रणाली' लगाई गई है. ये टैक्सियाँ ख़ासकर भुलक्कड़ लोगों के लिए वरदान साबित हो रही हैं. महानगर में टैक्सियों में सामान छूटने की घटनाओं में होने वाली वृद्धि को ध्यान में रखकर ही टैक्सी मालिकों का संगठन 'बेंगाल टैक्सी एसोसिएशन' ने इस समस्या पर अंकुश लगाने के लिए ही इस प्रणाली की शुरुआत की है. हाल ही में महानगर में इलेक्ट्रॉनिक मीटर वाली वातानुकूलित टैक्सियाँ 'ब्लू ऐरो' नाम से शुरू की गईं हैं जिनमें यात्रियों को छपी हुई रसीदें भी मिलती हैं. टैक्सी एसोसिएशन ने अगले महीने से टैक्सियों में फ़ोन की सुविधा मुहैया कराने का भी फ़ैसला किया है. संगठन ने इन टैक्सियों को 'मित्र टैक्सी' का नाम दिया है. यानी अब ये टैक्सियाँ यात्रियों के साथ मित्र और शुभचिंतक की तरह व्यवहार करती हैं. कई फ़ायदे होंगे जिस बंगाल टैक्सी संगठन की पहल पर ये सुविधाएँ शुरू हो रही हैं उनके सदस्यों की संख्या महज 800 है. 'बेंगाल टैक्सी एसोसिएशन' के महासचिव विमल गुहा का कहना है कि उनके पास रोज़ाना शिकायतें आती थीं कि अमुक चीज़ टैक्सी में छूट गई है. ज़्यादातर लोगों को टैक्सी का नंबर भी याद नहीं होता था.
इस तरह इस परिस्थिति में सामान का मिलना टैक्सी चालक की ईमानदारी पर ही निर्भर होता था. इसके आलावा यात्रियों के साथ चालकों के दुर्व्यवहार के मामले में भी टैक्सी का नंबर न होने की वजह से अक़सर कोई कार्रवाई नहीं हो पाती थी. गुहा का कहना है कि अब इस नई प्रणाली के आने से यात्रियों, ट्रैफ़िक पुलिस और संगठन को ऐसे मामलों में संबंधित टैक्सी को तलाशने में काफी सहूलियतें होंगी. फ़िलहाल परीक्षण के तौर पर पाँच टैक्सियों में यह प्रणाली लगाई गई है. गुहा बताते हैं कि परीक्षण क़ामयाब रहने पर अगस्त से 1000 टैक्सियों में ये प्रणाली लगाई जाएगी. कोलकाता की सड़कों पर लगभग 30,000 टैक्सियां चलती हैं. मुफ़्त उपकरण कोलकाता में ही बने इस इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की क़ीमत 8000 रुपए रखी गई है और मज़ेदार बात ये है कि टैक्सी मालिकों को यह रकम नहीं देनी होगी. उपकरण उनको एक विज्ञापन संस्था मुफ्त में दे रही है. यह उपकरण दरवाज़ा खोलने के दस सेकेंड बाद ही काम करना शुरू कर देता है और पूरी यात्रा के दौरान यात्री को हर पाँच मिनट पर यात्री को टैक्सी नंबर और सामान के बारे में सचेत करता रहता है, जो यात्री की सीट के पीछे लगा होगा. निर्माता कंपनी ने उपकरण की माँग बढ़ाने के लिए चालकों को हर महीने 200 रुपए देने की भी घोषणा की है, जिससे अधिक से अधिक टैक्सियों में इसे लगाया जा सके. इस प्रणाली के सफल होते ही शीघ्र ही टैक्सियों में फोन की सुविधा भी मुहैया करा दी जाएगी. विमल गुहा बताते हैं कि यह सुविधा उन यात्रियों के लिए ज़्यादा लाभदायक होगी जो मोबाइल फोन नहीं रखते. यात्री इससे फ़ोन कर चालक से बिल की रसीद भी ले सकेंगे. टैक्सियों में यात्रियों को फोन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए संगठन रिलायंस इन्फोकॉम से बात कर रहा है. गुहा कहते हैं कि ट्रैफिक जाम के लिए मशहूर कोलकाता में टैक्सी में फोन होने पर आम लोगों को काफी सहूलियतें होगीं. टैक्सी मालिकों को 12,000 रुपये का यह उपकरण मासिक किश्तों में देने की व्यवस्था की जाएगी. चालकों को भी उपकरण के रखरखाव के लिए मासिक भत्ता दिया जाएगा. पहले दौर में यह फ़ोन 15 टैक्सियों में लगा जाएंगे. इसके बाद महानगर की सभी टैक्सियों में ये सुविधा मुहैया कराई जाएगी. राज्य सरकार और ट्रैफ़िक पुलिस की ओर से हरी झंडी मिल जाने के बाद अगस्त से ही इस तरह की टैक्सियां कोलकाता की सड़कों पर दौड़ने लगेंगी. टैक्सियों में इन सुविधाओं के आ जाने से कोलकाता वासियों को जल्दी ही टैक्सी का सफ़र रोचक और खुशगवार लगने लगेगा. |
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