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मंगलवार, 27 जुलाई, 2004 को 11:47 GMT तक के समाचार
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कश्मीर में मज़दूर संगठन सक्रिय हुए

कश्मीर
कश्मीर में वर्षों से शांति का इंतज़ार है
भारतीय कश्मीर में मज़दूर और कर्मचारी एक बार फिर पृथकतावादी आंदोलन में सक्रिय हुए हैं और उनकी माँग है कि समस्या का हल स्थानीय लोगों की इच्छा के अनुसार निकलना चाहिए जिससे शांति का नया दौर शुरू हो सकेगा.

पिछले पाँच महीनों के दौरान मज़दूर संगठन - ट्रेड यूनियन सेंटर ने श्रीनगर और घाटी के विभिन्न ज़िलों में कई बड़ी रैलियों का आयोजन किया जिनमें उपस्थित कर्मचारियों ने 'जनसंहार बंद करो' और 'कश्मीर समस्या को हल करो' के नारे लगाए.

14 वर्ष पहले जब भारतीय कश्मीर में सरकार के विरुद्ध सशस्त्र आंदोलन शुरू हुआ था तो सरकारी कर्मचारी सुरक्षाबलों पर मानव अधिकारों के हनन का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन में आगे आए थे.

यहाँ तक कि 1993 में पुलिसकर्मियों ने भी बग़ावत कर डाली थी. सरकारी कर्मचारियों ने 1995 में चुनाव ड्यूटी करने से भी इनकार कर दिया था.

अगस्त 1996 में जोशीले भाषण करने वाले मज़दूर नेता इश्तियाक क़ादरी अचानक भारत सरकार समर्थक खेमे चले गए थे और इस प्रकार से पृथकतावादी मोर्चे पर सरकारी कर्मचारियों की गतिविधियाँ लगभग समाप्त हो गई थीं.

संपत प्रकाश

क़रीब छह वर्ष की ख़ामोशी के बाद राज्य के सबसे वरिष्ठ मज़दूर नेता संपत प्रकाश पृथकतावादी मंच पर फिर से सक्रिय हुए हैं.

संपत प्रकाश
संपत प्रकाश घाटी में लंबे समय से मज़दूर आंदोलन से जुड़े हुए हैं

संपत प्रकाश ट्रेड यूनियन के अध्यक्ष राज्य में अल्पसंख्यक पंडित समुदाय से हैं.

कश्मीर के पृथकतावादी आंदोलन में मज़दूर संघ की भागीदारी के बारे में संपत प्रकाश का अपना एक दृष्टिकोण है. वह कहते हैं कि कश्मीर विवाद के स्थाई समाधान से उपमहाद्वीप में मज़दूर समुदाय को सीधा लाभ होगा.

संपत कहते हैं, "कश्मीर एक विवाद है इसका कश्मीरी जनता की इच्छाओं के अनुसार समाधान निकाला जाए. ऐसा करके ही उपमहाद्वीप में स्थाई शांति स्थापित होगी जो कि दोनों देशों ही नहीं बल्कि पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र के मज़दूर समुदाय के हितों के लिए ज़रूरी है."

इतिहास का वास्ता

प्रकाश के सहयोगी राजा मोहम्मद अमीन कहते हैं, 'जहाँ तक कश्मीर समस्या का प्रश्न है यह हमारे लिए एक राष्ट्रीय मुद्दा है. अधिकांश लोग इसे एक विवाद मानते हैं. हमें नहीं लगता कि राजनीतिक नारा देने में कोई ग़लती है."

 'कश्मीर एक विवाद है और इसका कश्मीरी जनता की इच्छाओं के अनुसार समाधान निकाला जाए. ऐसा करके ही उपमहाद्वीप में स्थाई शांति स्थापित होगी जोकि दोनों देशों ही नहीं बल्कि पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र के मज़दूर समुदाय के हितों के लिए ज़रूरी है.
संपत प्रकाश

"हम मज़दूर समुदाय की समस्याओं की ओर ध्यान दिलाने के साथ-साथ भारत और पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं कि वह कश्मीर विवाद को हल करें."

17 वर्षों तक अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी संघ के महासचिव रह चुके संपत प्रकाश कहते हैं कि वह अन्य देशों को कश्मीर में स्वतंत्रता के लिए जारी आंदोलन में सहयोग देने के लिए तैयार करेंगे.

वह कहते हैं कि सरकारी कर्मचारी अपने-अपने देशों में विरोध प्रदर्शन करें और भारत और पाकिस्तान की सरकारों को स्मरण-पत्र भेजकर उन पर कश्मीर समस्या का समाधान निकालने के लिए दबाव डालें.

संपत प्रकाश इसी मक़सद से इस वर्ष सितंबर में श्रीनगर में एक सम्मेलन आयोजित करने की तैयारियों में लगे हुए हैं.

संपत प्रकाश अपने इस प्रयास में भारत मज़दूर नेताओं एसके व्यास, शरद राव, आरजी कार्णिक, सुरिंदर मोहन, एमआर चिब्बे, पाकिस्तान के करामत अली, बीएम कुटली और जहाँगीर जैसे मज़दूर नेताओं का समर्थन होने का दावा करते हैं.

संपत प्रकाश कहते है कि वह इसके बाद यूरोप की मज़दूर कांफ्रेंस को भी घाटी में बुलाएंगे.

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