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'सैनिक इराक़ भेजने पर पुनर्विचार नहीं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय विदेश मंत्री नटवर सिंह के इराक़ संबंधित बयान पर वामपंथी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया ज़ाहिर की है. विदेश मंत्री नटवर सिंह ने गुरुवार को वाशिंग्टन में अमरीकी विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल से मुलाक़ात के बाद कहा था कि भारत ने इराक़ में बहुराष्ट्रीय बल में सैनिक भेजने पर फ़ैसला नही लिया है. वामपंथी दल काँग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं और उन्होंने माँग की है कि सरकार इस विषय में स्पष्टीकरण दे. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रकाश कारात ने कहा कि इराक़ पर अब भी अमरीका का कब्ज़ा है और अमरीकी सेना इराक़ से हटी नहीं है. उन्होने कहा कि जो सरकार इराक़ में बनाई गई है वह भी इराक़ियों की चुनी हुई नहीं है बल्कि अमरीकियों की बनाई हुई ही है. प्रकाश कारात ने कहा कि इन परिस्थितियों में भारत जब इराक़ में सेना भेजने के ख़िलाफ़ फ़ैसला ले चुका है तो अब इस पर पुनर्विचार करने की ज़रूरत नहीं है. जब उनसे पूछा गया कि संयुक्त राष्ट्र में नया इराक़ प्रस्ताव पारित हो जाने के बाद क्या स्थिति बदली नहीं है, तो उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद के अन्य देश तो ऐसा नहीं कर रहे तो भारत क्यों करे? |
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