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सबसे महान बंगाली कौन? | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी की बंगला सेवा के श्रोताओं ने बांगलादेश के पहले राष्ट्रपति और संस्थापक, शेख़ मुजीबर रहमान को “महानतम बंगाली” चुना है. फ़रवरी और मार्च के महीनों के दौरान किये गए एक रेडियो सर्वेक्षण में लोगों से कहा गया था कि वे उन पाँच बंगालियों के नाम लिख कर भेजें, जिन्हें वे सबसे महान समझते हैं. इस सर्वेक्षण को स्वतंत्र और निष्पक्ष रखने के लिए कड़े मापदंड इस्तेमाल किये गए थे. विजेताओं के नामों की घोषणा, बांगलादेश के स्वतंत्रता-दिवस, 26 मार्च से ले कर बंगाली नव वर्ष, 14 अप्रैल तक बीस दिनों के दौरान की गई है. वर्ष 1975 में हत्यारों की गोलियों के शिकार हुए, बांगलादेश के संस्थापक, शेख़ मुजीब ने नॉबेल पुरस्कार-विजेता कवि और नाटककार, रबीन्द्रनाथ ठाकुर को आसानी से पीछे छोड़ दिया. श्रोताओं के इस सर्वेक्षण में जिन अनेक विशिष्ट बंगाली हस्तियों के नाम सामने आए उनमें बांगलादेश की मौजूदा प्रधानमंत्री के पति, ज़िया-उर-रहमान भी शामिल हैं, जिनकी हत्या कर दी गई थी. जीवित व्यक्ति बस एक... एक अन्य नॉबेल पुरस्कार-विजेता, अर्थशास्त्री, अमर्त्य सेन बीस महानतम बंगालियों की सूची में एकमात्र जीवित व्यक्ति हैं. उनका नाम चौदहवें नंबर पर रहा.
वे पाथेर पंचाली और शतरंज के खिलाड़ी जैसी क्लासिक फ़िल्मों के निदेशक, सत्यजीत रे से एक स्थान पीछे रहे. शेख़ मुजीब को, जिन्हें बंगबंधु के नाम से भी जाना जाता है, अनेक लोग सन् 1971 में पाकिस्तान से बांगलादेश को आज़ाद कराने का श्रेय देते हैं. इस सर्वेक्षण में दूसरे स्थान पर रहे रवींद्रनाथ टैगोर को, अनेक लोग बंगला भाषा के शेक्सपियर कहते हैं, और वे भारत तथा बांगलादेश – दोनों ही देशों में अत्यंत प्रतिष्ठित और लोकप्रिय हैं. टैगोर ने भारत और बांगलादेश – दोनों देशों के राष्ट्र-गान लिखे थे. बीबीसी श्रोताओं के इस सर्वेक्षण में उनका काव्य-प्रेम भी ज़ाहिर हुआ है, जो तीसरे नंबर पर क्रान्तिकारी कवि, काज़ी नज़रुल इस्लाम के उनके चयन से साफ़ झलकता है. काज़ी नज़रुल इस्लाम को ब्रिटिश औपनिवेशिक शासकों ने क्रान्तिकारी कविताएँ लिखने के लिए जेल में बंद कर दिया था. बांगलादेश में विशेष रूप से सम्मानित काज़ी नज़रुल इस्लाम ने सैंकड़ों प्रेम-गीत और भजन भी लिखे थे. एक ही महिला श्रोताओं के इस सर्वेक्षण में बीस महानतम बंगालियों की सूची में केवल एक महिला, रुकैया सखावत हुसैन का नाम शामिल हुआ है, जिन्हें बेगम रुकैया के नाम से भी जाना जाता है. बीस महानतम बंगालियों की सूची में उनका नाम छठे स्थान पर है. उन्होंने बीसवीं सदी के आरंभ में बंगाल में मुस्लिम महिलाओं के लिए शिक्षा की शुरुआत करके सामाजिक रोष और बहिष्कार की जोख़िम उठाई थी. महानतम बीस बंगालियों की सूची में कुछ अन्य समाज-सुधारकों और क्रांतिकारियों के नाम भी शामिल हैं, जैसे सुभाष चंद्र बोस, जिन्होंने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश शासन के खिलाफ़ एक विफल हथियारबंद बग़ावत की थी, इस सूची में पाँचवें नंबर पर हैं. समाज-सुधारक और शिक्षाविद ईश्वर चंद्र विद्यासागर को आठवाँ स्थान मिला है, जिन्होंने हिंदू समाज में जाति-प्रथा को ख़त्म करने की कोशिश की थी. उन्नीसवीं सदी में ब्रिटिश शासन के ख़िलाफ़ बग़ावत करने वाले मीर निसार अली तितुमीर का नाम ग्यारहवें स्थान पर है. वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु को सातवाँ स्थान मिला है. कुल मिला कर इस रेडियो सर्वेक्षण में सौ से भी अधिक बंगाली हस्तियों के नाम सामने आए हैं, और महानतम बीस हस्तियों की सूची श्रोताओं के प्राथमिकता-क्रम के मुताबिक़ दिये गए अंकों के आधार पर तैयार की गई है. बांगलादेश और पूर्वी भारत के पश्चिम बंगाल राज्य में लगभग एक करोड़ बीस लाख लोग बीबीसी की बांगला सेवा को सुनते हैं. |
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