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मंगलवार, 03 फ़रवरी, 2004 को 12:32 GMT तक के समाचार
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शांति निकेतन की शांति ख़तरे में

शांति निकेतन
शांति निकेतन तेज़ी से सैरगाह में बदल रहा है
गुरूदेव रवींद्रनाथ ठाकुर ने जिस शांति की तलाश में लगभग 80 वर्ष पहले वीरभूम ज़िले में शांति निकेतन की स्थापना की थी वहाँ शांति का दूर-दूर तक पता नहीं है.

लगभग बीस वर्ष पहले तक प्रदूषणमुक्त शांति निकेतन में जहाँ बड़ी तादाद में लोग पढ़ने-लिखने और कलाएँ सीखने आते थे वहीं अब यह सैलानियों की सैरगाह बनकर रह गया है.

शांति निकेतन के शांत माहौल को बचाने के लिए स्थानीय लोगों ने अब एक संगठन बनाया है--शांति निकेतन अंचल आवासिक समिति.

इस समिति ने कोलकाता हाई कोर्ट में एक याचिका दायर करके शांति निकेतन के स्वरूप, संस्कृति और पर्यावरण को बचाने की गुहार लगाई है.

शांति निकेतन अंचल आवासिक समिति के सुशांत ठाकुर कहते हैं, "व्यावसायिक फ़ायदे के लिए शांति निकेतन को कंक्रीट के जंगल में बदलने की साज़िश चल रही है. अब अदालत ही इसे बचा सकती है."

बुरी हालत

दरअसल, कंक्रीट के तेज़ी से फैलते जंगल में शांति निकेतन का असली स्वरूप कहीं खो गया है.

महाश्वेता देवी
महाश्वेता देवी ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की अपील की

शायद ही कोई धनी-मानी व्यक्ति हो जिसका मकान, फ्लैट या फार्महाउस यहाँ न हो.

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान सौरभ गांगुली से लेकर कई बड़े उद्योगपति इसमें शामिल हैं.

ये लोग शांति की तलाश में सप्ताहांत में यहाँ पहुँच जाते हैं, उन्हें शांति मिलती है या नहीं, यह तो नहीं मालूम लेकिन शांति निकेतन की शांति ज़रूर भंग होती है.

कोलकाता से ढाई घंटे के सफ़र के बाद यहाँ पहुँचने पर चारों तरफ़ कंक्रीट की इमारतें नज़र आती हैं और दिखाई देते हैं होटलों और लॉजों के बोर्ड.

स्टेशन से विश्वविद्यालय तक जाने के लिए पतली-सी सड़क पर पहले लोग सिर्फ़ रिक्शे से जाते थे लेकिन अब कारों और तिपहिया वाहनों का ताँता लगा रहता है.

यह बात सही है कि बाहरी लोगों के आने-जाने से स्थानीय लोगों की कमाई बढ़ी है लेकिन साथ ही प्रदूषण भी बहुत ज़्यादा बढ़ गया है.

शांति निकेतन के उप कुलपति सुजीत बोस का कहना है कि "हर जगह बदलाव की लहर चल रही है, शांति निकेतन भी कोई अपवाद नहीं, आप घड़ी की सुई को पीछे तो नहीं घुमा सकते?"

चिंता

जानी-मानी लेखिका महाश्वेता देवी भी शांति निकेतन की बुरी हालत को लेकर चिंतित हैं.

 हर जगह बदलाव की लहर चल रही है, शांति निकेतन भी कोई अपवाद नहीं, आप घड़ी की सुई को पीछे तो नहीं घुमा सकते?"
शांति निकेतन के उप कुलपति

वे कहती हैं, "यहाँ गुरूदेव की विरासत ख़तरे में है, जलाशय पाटे जा रहे हैं और बहुमंज़िला इमारतें खड़ी हो रही हैं."

इतना ही नहीं, शांति निकेतन के पास ही शराब चार दुकानें भी खुल गई हैं.

महाश्वेता देवी ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अपील की है कि वे मामले में हस्तक्षेप करें और शांति निकेतन की शांति को बचाएँ.

लोग आरोप लगाते हैं कि इस हालत के लिए शांति निकेतन प्राधिकरण ज़िम्मेदार है जिसे "सिर्फ़ पैसा बनाने की चिंता है."

प्राधिकरण अब शांति निकेतन से थोड़ी दूरी पर 24 एकड़ ज़मीन में एक मनोरंजन पार्क बनाने में लगा है.

वीरभूम से सांसद सोमनाथ चटर्जी दावा करते हैं कि बेतरतीब निर्माण को रोकने के लिए काफ़ी क़दम उठाए जा रहे हैं.

रवींद्रनाथ ठाकुर ने 1901 में पाँच छात्रों को साथ लेकर एक स्कूल खोला था जो बीस वर्ष के भीतर राष्ट्रीय विश्वविद्यालय बन गया.

शांति निकेतन में इस समय छह हज़ार छात्र पढ़ते हैं.

इस प्रसिद्ध विश्वविद्यालय के बदलते स्वरूप पर बहस तेज़ हो गई है, शांति निकेतन को सैरगाह और भीड़ भरा बाज़ार बनने से बचाना संभव हो पाएगा या नहीं, इसका ठोस जवाब किसी के पास नहीं है.

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