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आडवाणी, रथयात्रा और लालू का बिहार... | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी बुधवार को एक बार फिर बिहार में अपना रथ लेकर पहुँचे. इस बार भी उन्होंने लालू प्रसाद यादव को चुनौती देते हुए कहा कि वे उनके रथ को रोककर उन्हें गिरफ़्तार करके दिखाएँ. ग़ौरतलब है कि 1990 में आडवाणी की रथ यात्रा को बिहार में रोककर उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया था. उस समय बिहार में लालू प्रसाद यादव की सरकार थी. इस बार भी लालू प्रसाद यादव ने चेतावनी दी थी कि यदि भाजपा के लोगों ने सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की तो आडवाणी को फिर गिरफ़्तार कर लिया जाएगा. लालू के घर से उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने बिहार में अपनी पहली चुनावी सभा लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के पुश्तैनी घर गोपालगंज से शुरु की. उन्होंने इस सभा में 14 साल पहले की उस रथ यात्रा को याद किया जिसे समस्तीपुर में रोक दिया गया था और उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया था. लालू प्रसाद यादव की चुनौती को ध्यान में रखकर ही शायद आडवाणी ने कहा था, ''1990 में मुझे गिरफ़्तार करके लालू प्रसाद ने बीजेपी को सत्ता में लाने की कृपा की और उस समय की विश्वनाथ प्रताप सिंह सरकार का ख़ात्मा कर दिया.'' इसके बाद भाजपा के लोगों ने बयान दिए थे, ''आडवाणी जी को लालू जी एक बार और गिरफ़्तार कर लें तो बिहार की सारी सीटें भाजपा जीत ले.'' हालाँकि इस बार कई चीज़ें अलग हैं, इनमें से एक यह भी है कि इस बार नाम को ही सही, मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव नहीं, राबड़ी देवी हैं और दूसरा यह कि लालू प्रसाद ने पहले ही नरमी दिखाते हुए कह दिया था कि चुनाव प्रचार कोई भी कर सकता है, बशर्ते सांप्रदायिक भावनाएँ न भड़काईं जाएँ. इस बार सरकार ने आडवाणी की रथ यात्रा के लिए पुख़्ता सुरक्षा इंतज़ाम किए. कारण यह भी है कि नक्सलवादी संगठनों ने रथ को रोकने की धमकी दी थी. |
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