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प्रमुख अख़बारों के साथ बीबीसी हिंदी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी हिंदी डॉट कॉम ने भारत के सुदूरवर्ती इलाक़ों में भी लोगों तक पहुँचने के लिए दो अख़बारों से सहयोग करने का फ़ैसला किया है. इसके तहत 'दैनिक भास्कर' और 'प्रभात ख़बर' को बीबीसी हिंदी डॉट कॉम अपनी ख़बरें मुहैया कराएगा. ये अख़बार बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के नाम से ये ख़बरें अख़बारों पर और अपनी वेबसाइट पर भी लगाएँगे. इसी संदर्भ में भोपाल में दैनिक भास्कर से समझौता हुआ. इधर राँची में इस समझौते के अवसर पर यहाँ के बुद्धिजीवियों और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों के सवालों का बीबीसी हिंदी डॉट कॉम की संपादक सलमा ज़ैदी ने जवाब दिया. यहाँ लोगों के मन में सबसे बड़ी जिज्ञासा यही थी कि बीबीसी हिंदी रेडियो के होते हुए आख़िर बीबीसी हिंदी को वेबसाइट शुरू करने की ज़रूरत क्यों आ पड़ी. इस पर उन्हें बताया गया कि बीबीसी की यही कोशिश है कि समाज के सभी वर्गों तक पहुँचा जाए और उसके लिए माध्यम जो भी हो उसका पूरा इस्तेमाल होना चाहिए. बीबीसी हिंदी रेडियो के ज़रिए जहाँ दूर-दराज़ के गाँव में लोग जानकारियाँ पाते हैं वहीं वेबसाइट के ज़रिए देश-विदेश में रहने वाले लोग हिंदी भाषा में दुनिया भर के समाचार और अन्य जानकारियाँ पा सकते हैं.
इसी के तहत सलमा ज़ैदी ने बताया कि इन दोनों अख़बारों के ज़रिए सुदूरवर्ती इलाक़ों के लोग भी अब बीबीसी हिंदी डॉट कॉम की सामग्री पढ़ सकेंगे. उन्होंने बताया कि इन अख़बारों के अलावा भी कुछ अख़बारों से बातचीत चल रही है. इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के लोग उपस्थित थे जिनमें कार्डिनल तेलेस्फोर पी टोप्पो भी शामिल थे. वह देश के तीन कार्डिनल में से एक हैं. बीबीसी के बिहार संवाददाता मणिकांत ठाकुर भी इस मौक़े पर मौजूद थे. |
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