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श्रीलंका में सरकारी प्रसारण पर नियंत्रण | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका में चुनाव के दौरान सरकारी टेलीविज़न और रेडियो चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार काम करेंगे. पक्षपात और सरकारी टेलीविज़न-रेडियो के दुरुपयोग के आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने ये फ़ैसला किया है. श्रीलंका में शुक्रवार को चुनाव होने हैं. ऐसा पहली बार हुआ है कि चुनाव के दौरान सरकारी समाचार माध्यम किसी स्वतंत्र एजेंसी के अधीन काम करेंगे. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि श्रीलंका के संविधान में ऐसा करने का प्रावधान है चाहे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ है. चुनाव प्रचार में समाचार माध्यमों की भूमिका को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला है. पाँच महीने पहले राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा के सरकारी समाचार माध्यमों को अपने अधीन करने के फ़ैसले के बाद पक्षपात के आरोप लगे हैं. लेकिन चंद्रिका कुमारतुंगा ने बीबीसी को हाल में दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि सरकारी समाचार माध्यम जितने इन महीनों में स्वतंत्र रहे हैं उतने स्वतंत्र वे कभी नहीं थे. लेकिन चुनाव आयोग इन विचारों से सहमत नहीं है. अब एक सरकारी अधिकारी टेलीविज़न और रेडियो के कामकाज पर नज़र रखेंगे. लेकिन सरकारी रेडियो के प्रमुख हडसन समरसिंघे का कहना है कि इस फ़ैसले को क़ानूनी चुनौती दी जाएगी. स्वतंत्र पर्यवेक्षकों का मानना है कि ये निर्णय बहुत देर से किया गया है. |
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