BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
रविवार, 21 मार्च, 2004 को 17:42 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
बीबीसी का कारवाँ नवादा में

अनुराधा नवादा में
नवादा में कारवाँ के एक प्रतिभागी के साथ अनुराधा प्रीतम
जब बीबीसी कारवाँ के दौरान नवादा की बारी आई तो ‘विकास और हम’ पर विचार मंथन शुरु हुआ.

अशिक्षा, कुशासन जैसे मुद्दे पर तो न जाने कितनी बार चर्चाएँ हो चुकी है. बहुत कुछ लिखा और कहा गया है. लेकिन नवादा में लोगों ने बात को आगे बढाया.

चिलचिलाती धूप में सात किलोमीटर की दूरी तय करके आए ब्रजेश पटेल ने विकास योजनाओं के दुरुपयोग के लिए सरकार की खिंचाई की.

वहीं एक छात्रा शबनम परवीन ने मानो तीर ठीक निशाने पर दागते हुए कहा कि अब वो समय आ गया है जब हम अपने क्षेत्र के विकास को अपना हक मानें.

लेकिन एक सच ये भी साफ नज़र आया कि कई बार कहना तो आसान होता है लेकिन उसे कर पाना काफी मुश्किल.

भय और भ्रष्टाचार के आतंक से भयभीत नवादा के कुछ लोगों ने गुमनाम होकर पर्चों के माध्यम से जब अपनी बात हम तक पहुँचाई तो मैं सोच में पड़ गया ...सच्चे का बोल बाला ...क्या वाक़ई.

कथनी को करनी में बदल पाना कितना मुश्किल है. कितनी अड़चने हैं, क्या क्या मजबूरियाँ हैं वो हर बार सामने नहीं आ पातीं.

कई बार आपके तमाम सवालों के जवाब में केवल खामोशी ही मिलती है. और शायद इसी खामोशी में लोगों के जवाब छिपे होते हैं.

कारवाँ का रास्ता
कारवाँ का रास्ता

इससे जुड़ी ख़बरें
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>