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गुरुवार, 05 फ़रवरी, 2004 को 16:28 GMT तक के समाचार
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भारत बदला, क्या बदला गोंडा?

आपकी बात बीबीसी के साथ कारवाँ
परिचर्चा में क्षेत्र के प्रमुख लोगों ने हिस्सा लिया
'आपकी बात बीबीसी के साथ कारवाँ' आज लखनऊ से चलकर गोंडा पहुँचा.

मौसम ख़ुशगवार था और बीबीसी के सैकड़ों श्रोता गोंडा के टॉमसन इंटर कॉलेज में मौजूद थे.

जब मैं सीमा चिश्ती, रामदत्त त्रिपाठी और अन्य सहयोगियों के साथ वहाँ पहुँची तो दूर से भीड़ देखकर शक हुआ कि ग़लती से किसी राजनीति रैली में तो नहीं आ पहुँचे.

तभी मैदान के बीचोबीच खड़ी बीबीसी की वो बस दिखाई दी जो अब तक एक मंच बन चुकी थी. पृष्ठभूमि में बीबीसी के कार्यक्रम की आवाज़ गूँज रही थी.

हम लोग पहुँचे तो ऐसा ज़ोरदार स्वागत हुआ कि मन में सवाल उठा कि हम पत्रकार और प्रसारक हैं या फ़िल्मी सितारे हैं.

लेकिन गोंडा में परिचर्चा के लिए हमने जो विषय चुना था उसका फ़िल्मों से दूर-दूर का कोई संबंध नहीं है, विषय था- भारत बदला, क्या बदला गोंडा?

इस विषय में श्रोताओं के प्रश्नों और शंकाओं के जवाब देने के लिए हमने जिन स्थानीय विशेषज्ञों को आमंत्रित किया था उनके नाम हैं डॉक्टर ओएन पांडे जो एक चिकित्सक हैं, अंबिका प्रसाद आज़ाद एक ग़ैर सरकारी संगठन चलाते हैं, मंजुला रानी त्रिपाठी यहाँ के डिग्री कॉलेज में राजनीति शास्त्र पढ़ाती हैं और मुमताज़ अली ख़ान टॉमसन इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य हैं.

कार्यक्रम का संचालन सँभाला सीमा चिश्ती ने और आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही वहाँ सवालों का अंबार लग चुका था.

प्रश्नों में से अनेक चिंताएँ झाँक रही थीं जैसे गोंडा में विकास की कमी, सड़कों की ख़राब हालत, बिजली की कमी, भ्रष्टाचार वग़ैरह-वग़ैरह.

मगर सबसे बड़ा सवाल शिक्षा या कहें शैक्षिक संस्थानों को लेकर था.

आपकी बात बीबीसी के साथ कारवाँ
कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी

एक घंटे के कार्यक्रम में आधा समय तो इसी बारे में बहस होती रही. बहुत से लोगों ने ख़ुद माइक पर आकर प्रश्न पूछे और कुछ ने वहाँ आकर अपने विचार व्यक्त किए.

ये प्रश्न कि क्या गोंडा बदला भले ही अपना पूरा जवाब नहीं ढूँढ़ पाया हो मगर ये बात ज़रूर स्पष्ट हुई कि गोंडावासी जागरूक ज़रूर हैं या हुए हैं.

मेरा गोंडा से ये पहला परिचय था तो मैं कह नहीं सकती कि सच क्या है. दोपहर बाद रामदत्त त्रिपाठी के साथ कुछ पत्रकारों से मुलाक़ात हुई.

रामदत्त जी ने कहा था कि गोंडा के चार-पाँच पत्रकार बंधु मिलने आएँगे. चार-पाँच?..अरे साहब यहाँ तो 20-30 पत्रकार मौजूद थे और वहाँ से कई समाचार पत्र निकलते हैं.

जागरूकता का और क्या सबूत चाहिए? इन पत्रकार बंधुओं ने भी कई सवाल उठाए, बीबीसी को लेकर उसकी विश्वसनीयता को लेकर, उसकी लोकप्रियता को लेकर.

मगर सौ सवालों का एक सवाल ये था कि आख़िर गोंडा वासियों को बीबीसी के सामने अपनी तक़लीफ़ें बयान करने की क्या ज़रूरत थी.

कारवाँ का अगला पड़ाव फ़ैज़ाबाद के सिविल लाइन्स स्थित राजकीय कन्या इंटर कॉलेज में दोपहर एक बजे होगा.

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