| आडवाणी निकले चुनावी रथयात्रा पर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की चुनावी रथ यात्रा बुधवार को कन्याकुमारी से शुरू हुई जिसे 'भारत उदय यात्रा' का नाम दिया गया है. पार्टी अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने झंडी दिखा कर उन्हें 33 दिनों की इस यात्रा पर रवाना किया. इस मौक़े पर एक रैली की गई और कुछ मुस्लिम नेता भी वहाँ मौजूद थे जिनमें केंद्रीय विमानन मंत्री शाहनवाज़ हुसैन, महासचिव मुख़्तार अब्बास नक़वी शामिल हैं. मुख़्तार अब्बास नक़वी ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा, "यह कोई हिंदू रैली नहीं है. यह एक राजनीतिक यात्रा है और इसका मक़सद विकास, सुरक्षा और समृद्धि का संदेश देना है." पिछले 14 वर्षों में आडवाणी की ये तीसरी रथयात्रा है. विपक्षी काँग्रेस आरोप लगाती है कि भारतीय जनता पार्टी देश में सांप्रदायिक हिंसा भड़काती है और ख़ासतौर से 2002 में गुजरात में हुए सांप्रदायिक दंगों के लिए पार्टी ही ज़िम्मेदार थी. ग़ौरतलब है कि फ़रवरी में गोधरा में एक रेलगाड़ी को आग लगाए जाने के बाद भड़के दंगों में दो हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए थे. पार्टी अध्यक्ष वैंकया नायडू ने यात्रा को हरी झंडी दिखाते हुए कहा कि इस यात्रा से कोई तनाव नहीं होगा, सारा ज़ोर देश की प्रगति और समृद्धि दिखाने पर रहेगा." इस यात्रा पर रवाना होने से पहले आडवाणी कह चुके हैं, "पिछली यात्राओं के समय मैं विपक्ष में था और तब तत्कालीन सरकारों की आलaचना किया करता था." लेकिन उनका ये भी कहना है कि इस बार वे वाजपेयी सरकार के काम-काज को लेकर लोगों के बीच जा रहे हैं. विशेष रथ आडवाणी इस यात्रा में जिस रथ का इस्तेमाल कर रहे हैं उसका इस्तेमाल भाजपा नेता दिलीप सिंह जूदेव ने पिछले वर्ष छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में प्रचार के लिए किया था.
भगवे रंग का ये रथ एक एक वातानुकूलित बस को अलग रूप देकर तैयार किया गया है जो रथ कम और बस ही ज़्यादा लगती है. आडवाणी की पिछली अयोध्या रथयात्रा से अलग इस बार उनके रथ पर कोई धार्मिक प्रतीक नहीं है और इस पर केवल भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की तस्वीर है. इस बस में लिफ़्ट से काम करने वाली एक कुर्सी है और आडवाणी हर दिन पाँच बार बस से बाहर निकलकर जनता के सामने अपनी बात रखेंगे. दो चरण यात्रा दो चरणों में होगी. पहले चरण की शुरुआत कन्याकुमारी से होगी और इसका अंत 26 मार्च को अमृतसर में होगा. दूसरा चरण 30 मार्च को गुजरात में पोरबंदर से शुरू होगा और इसका अंत 14 अप्रैल को उड़ीसा में पुरी में होगा. इस यात्रा में लगभग 8,000 किलोमीटर का सफ़र तय किया जाएगा. आडवाणी इसमें अलग-अलग राज्यों के 121 लोकसभा क्षेत्रों का दौरा करेंगे. तीसरी यात्रा रामजन्मभूमि आँदोलन के समय 1989 में उन्होंने सोमनाथ से अयोध्या की यात्रा की थी. इस यात्रा को लेकर काफ़ी विवाद हुआ और बिहार में उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया था. इसके बाद भाजपा ने विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार से समर्थन वापस ले लिया था जिसके बाद राष्ट्रीय मोर्चा सरकार गिर गई थी. भारत की आज़ादी के 50 साल पूरे होने पर 1997 में आडवाणी ने एक और रथयात्रा निकाली थी. |
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