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करूणा ने माफ़ी की पेशकश ठुकराई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका में तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई के विद्रोही नेता कर्नल करुणा ने माफ़ी की पेशकश को ठुकरा दिया है. एलटीटीई के प्रमुख प्रभाकरण ने संगठन में टूट को रोकने की कोशिशों के तहत कर्नल करूणा को माफ़ी देने की पेशकश की थी. मगर साथ ही ये शर्त रखी थी कि करूणा अपनी सारी गतिविधियाँ तत्काल रोक दें. इससे पहले राजनयिकों ने आगाह किया था कि एलटीटीई में मौजूदा संकट से श्रीलंका की शांति प्रक्रिया को ख़तरा पैदा हो गया है. ग़ौरतलब है कि पिछले सप्ताह एलटीटीई के एक वरिष्ठ नेता कर्नल करुणा ने संगठन में नेतृत्व काडर पर असंतोष व्यक्त किया था जिसके बाद उन्हें संगठन से निकाल दिया गया था. नार्वे के दूत एरिक सोलहीम सोमवार को ही कोलंबो पहुँचे और उन्होंने सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच हुए शांति समझौते के जल्दी ही दो साल पूरे होने के हालात का जायज़ा लेना शुरू किया है. लेकिन उनकी इस यात्रा पर तमिल विद्रोहियों में नेतृत्व के संकट का साया पड़ गया है. असंतोष बरक़रार एलटीटीई के राजनीतिक प्रमुख एसवी थमिलसेवन ने कहा था कि कर्नल करुणा को इसलिए माफ़ी की पेशकश की गई है ताकि अगर वे चाहें तो अपनी पसंद की ज़िंदगी जी सकते हैं. लेकिन कर्नल करुणा के एक प्रवक्ता ने कहा है कि वे माफ़ी की यह पेशकश नहीं स्वीकार कर रहे हैं. ख़बरों में कहा गया है कि अब एलटीटीई के नेतृत्व ने कर्नल करुणा को अलग-थलग करने की कोशिशें तेज़ कर दी हैं. कर्नल करुणा अपने प्रभाव वाले बट्टीकलोआ क्षेत्र में हैं और संवाददाताओं का कहना है कि इसमें शक है कि वे नार्वे दूत एरिक सोलहीम से मुलाक़ात करेंगे या नहीं, हालाँकि ख़ुद करुणा ने इसकी इच्छा ज़ाहिर की है. दूसरी तरफ़ थमिलसेवन ने कर्नल करुणा के ख़िलाफ़ किसी सैनिक कार्रवाई से यह कहते हुए इनकार किया के वे सिर्फ़ "एक व्यक्ति भर" हैं. |
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