|
शुरू हो रही है आडवाणी की रथयात्रा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की भारत उदय यात्रा बुधवार से शुरू हो रही है. भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष वेंकैया नायडू झंडी दिखा कर उन्हें 33 दिनों की इस यात्रा पर रवाना करेंगे. पिछले 14 वर्षों में आडवाणी की ये तीसरी रथयात्रा है. उन्होंने दिल्ली से कन्याकुमारी रवाना होने से पहले कहा, "पिछली यात्राओं के समय मैं विपक्ष में था और तब तत्कालीन सरकारों की आलाचना किया करता था. मगर इस बार मैं वाजपेयी सरकार के काम-काज को लेकर लोगों के बीच जा रहा हूँ". विशेष रथ आडवाणी इस यात्रा में जिस रथ का इस्तेमाल कर रहे हैं उसका इस्तेमाल भाजपा नेता दिलीप सिंह जूदेव ने पिछले वर्ष छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में प्रचार के लिए किया था. भगवे रंग का ये रथ एक एयरकंडीशंड बस को अलग रूप देकर तैयार किया गया है जो रथ कम और बस ज़्यादा लगती है. आडवाणी की पिछली अयोध्या रथयात्रा से अलग इस बार उनके रथ पर कोई धार्मिक प्रतीक नहीं है और इसपर केवल भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की तस्वीर लगी है. इस बस में लिफ़्ट लगी हुई एक कुर्सी है और आडवाणी हर दिन पाँच बार बस से बाहर निकलकर जनता के सामने बात रखेंगे. दो चरण यात्रा दो चरणों में होगी. पहले चरण की शुरुआत कन्याकुमारी से होगी और इसका अंत 26 मार्च को अमृतसर में होगा. दूसरा चरण 30 मार्च को गुजरात में पोरबंदर से शुरू होगा और इसका अंत 14 अप्रैल को उड़ीसा में पुरी में होगा. इस यात्रा में 8,000 किलोमीटर का सफ़र तय किया जाएगा. आडवाणी इसमें अलग-अलग राज्यों के 121 लोकसभा क्षेत्रों का दौरा करेंगे. तीसरी यात्रा पिछले 14 वर्षों में आडवाणी की ये इस तरह की तीसरी यात्रा होगी. 1990 में रामजन्मभूमि आँदोलन के समय उन्होंने सोमनाथ से अयोध्या की यात्रा की थी. इस यात्रा को लेकर काफ़ी सरगर्मी मची और बिहार में उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया. इसके बाद भाजपा ने वी पी सिंह की सरकार से समर्थन वापस ले लिया जिसके बाद राष्ट्रीय मोर्चा सरकार गिर गई. 1997 में भारत की आज़ादी के 50 साल पूरे होने पर आडवाणी ने एक और रथयात्रा की थी. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||