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चीनी के कटोरे की आज ख़स्ता हालत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गन्ने की खेती पूर्वी उत्तर प्रदेश के काफ़ी बड़े हिस्से में किसानों की आमदनी का मुख्य ज़रिया रहा है. लेकिन आज से नहीं काफ़ी समय से ये किसान तरह-तरह की परेशानियों से जूझते रहे हैं और कई बार ये नौबत आ चुकी है कि वो गन्ना बोने के नाम से ही कान पकड़ने लगते हैं. गोरखपुर से देवरिया के रास्ते पर है सरदार नगर. सन 1903 में सरदार सुरिंदर सिंह मजीठिया ने यहाँ एक चीनी मिल लगाई जो लंबे समय तक इस इलाक़े की ही नहीं दक्षिण एशिया की मशहूर चीनी मिलों में से एक थी. ब्रिटेन की मौजूदा महारानी एलिज़ाबेथ ने भी क़रीब पचास साल पहले यहाँ का दौरा किया था. गन्ना और रेल खेतों से गन्ना लाने के लिए मिल की अपनी तीस किलोमीटर लंबी रेल लाइन है जिसपर चलता था सम्राट अशोक. ये दुनिया का सबसे पुराना रेल इंजन है जो अभी तक पटरियों पर दौड़ रहा था.
हालाँकि चार साल पहले ये फ़ैक्ट्री बीमार होकर बंद हुई तो उसका दौड़ना भी बंद हो गया लेकिन अब फ़ैक्ट्री चल पड़ी है और उम्मीद है कि सम्राट अशोक का सफ़र भी एक बार फिर शुरू होगा. ये हाल सिर्फ़ सरदार नगर का नहीं है. दरअसल पूर्वाँचल के छह ज़िलों में कुल मिलाकर 26 चीनी मिलें हैं, इनमें से तीन केंद्र सरकार के हाथ में हैं. तीनों बरसों से बंद पड़ी हैं और राज्य सरकार ने पुरानी निजी मिलों को कब्ज़े में लेकर जो चीनी निगम बनाया, उसकी भी ज़्यादातर मिलें तो बंद हैं और जो चालू हैं उनका पेराई सत्र भी नवंबर के बजाय फरवरी में जाकर शुरू हुआ है. ज़ाहिर है गन्ना किसान परेशान हैं और मिलों की पेराई शुरू होने का इंतज़ार किए बिना अपना गन्ना औने-पौने में भी क्रशर या गुड़ बनाने वालों को दे रहे हैं. चुनाव नज़दीक आता देख सरकार अब बंद फ़ैक्ट्रियों को खुलवाने की कोशिश में जुट गई है. दूसरी ओर गन्ने की कमी से परेशान मिल मालिक अब फ़ैक्ट्री को कुछ धीमी रफ़्तार से चला रहे हैं ताकि जितना गन्ना आ रहा है वो लगातार इस्तेमाल होता रह सके. भुगतान यही नहीं, जहाँ किसानों के पिछले भुगतान बक़ाया हैं और ताज़ा ख़रीद के लिए भी किसानों को पंद्रह दिन बाद भुगतान होता था, वहाँ अब इस हाथ ले और उस हाथ दे यानी तुरंत भुगतान का इंतज़ाम हो गया है.
और मिल के बाहर कुछ किसान मिले भी जो इस स्थिति से संतुष्ट नज़र आए. लेकिन आसपास के हालात बताते हैं कि जिस किसान से हमने ये सुना वो उदाहरण नहीं एक अपवाद ही था, जो नियम को उलटता नहीं सिद्ध करता है. और अब जो सबसे बड़ा सवाल पूर्वांचल की हवा में तैर रहा है वो ये कि कभी चीनी का कटोरा कहलाने वाले इस इलाक़े के किसान कहीं गन्ने की खेती छोड़ तो नहीं देंगे. हालाँकि अब चुनाव नज़दीक आने के साथ किसानों की बदहाली दूर करने के नारे हवा में गूंजने लगे हैं. सरदार नगर की एक और ख़ास बात. मशहूर चित्रकार अमृता शेरगिल ने अपनी छोटी सी ज़िंदगी का काफ़ी हिस्सा यहीं बिताया. वो ख़ुद मजीठिया ख़ानदान की थीं और उनके पति भी इसी कारख़ाने का काम देखते थे. हालाँकि अब उनकी ज़्यादातर निशानियाँ यहाँ नहीं हैं लेकिन हमें उनकी एक पेंटिंग यहाँ मिली जो उन्होंने इसी गाँव के तालाब को देखकर बनाई थी. |
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