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"श्रीलंका शांति प्रक्रिया को धक्का लगेगा" | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका में प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे ने कहा है कि 39 जूनियर मंत्रियों को बर्ख़ास्त करने के क़दम से देश में चल रही शांति प्रक्रिया को धक्का लगेगा. ग़ौरतलब है कि राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा ने बुधवार को 39 जूनियर मंत्रियों को यह कहते हुए बर्ख़ास्त कर दिया था कि उनके ख़िलाफ़ सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग करने के सबूत मिले हैं. प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे ने राष्ट्रपति कुमारतुंगा को पत्र लिखकर कहा है कि उनके क़दमों से शांति लाने के सरकार के प्रयासों में रुकावट पैदा हो रही है. "मैं यह ध्यान दिलाना चाहूँगा कि आप इस तरह की कार्रवाइयों से शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में भारी रुकावटें पैदा कर रही हैं." कुमारतुंगा का कहना है कि रनिल विक्रमसिंघे तमिल विद्रोहियों के साथ शांति बातचीत में कुछ ज़्यादा ही रियायतें दे रहे हैं. राष्ट्रपति कुमारतुंगा और प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे दोनों राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं और काफ़ी दिनों से खींचतान चल रही है. अब राष्ट्रपति ने संसद को भंग करके अप्रेल में चुनाव कराने की घोषणा कर दी जिससे यह खींचतान और बढ़ गई है. प्रधानमंत्री के एक प्रवक्ता जीएल पीरिस ने कहा है कि इस तरह आनन-फानन में चुनाव कराने से देश में अस्थिरता बढ़ेगा और अंतरराष्ट्रीय सहायता पर भी असर पड़ सकता है. "चुनाव कराने में राष्ट्रपति का एकमात्र मक़सद सत्ता पर क़ब्ज़ा करना है." |
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