BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
गुरुवार, 05 फ़रवरी, 2004 को 12:11 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
क्या कहते हैं अख़बार
क़दीर ख़ान की समर्थन में प्रदर्शन
क़दीर ख़ान को राष्ट्रीय हीरो माना जाता है
पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक डॉक्टर अब्दुल क़दीर ख़ान ने यह स्वीकार कर लिया कि उन्होंने ईरान, लीबिया और उत्तर कोरिया को परमाणु जानकारी लीक की.

इससे पाकिस्तान में एक नई बहस छिड़ गई है क्योंकि डॉक्टर क़दीर ख़ान को वहाँ एक राष्ट्रीय हीरो का दर्जा हासिल है और उनके समर्थन में प्रदर्शन भी हो रहे हैं.

पाकिस्तान के मीडिया ने डॉक्टर क़दीर ख़ान की हिमायत की है.

लगभग सारे अख़बार इस मामले में एकमत नज़र आते हैं.

पाकिस्तान

इस्लामाबाद से प्रकाशित होने वाले उर्दू दैनिक 'औसाफ़' का कहना है कि देश के परमाणु कार्यक्रम के बारे में यूरोप और अमरीका के सामने घुटने टेककर हमने अपने वैज्ञानिकों का अपमान किया है. अमरीका पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम ख़त्म करना चाहता है और हम उसका काम और आसान बना रहे हैं.

"अब अगर अमरीका यह आरोप लगाता है कि परमाणु प्रसार में सरकार का हाथ रहा है तो पाकिस्तान पर हमला होने से कौन रोक सकता है."

पेशावर से छपने वाले 'एक्सप्रेस' ने लिखा है कि पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में पश्चिमी मीडिया में छपे बयानों से यह तथ्य उजागर होता है कि अमरीका, यूरोप, इसराइल और भारत पाकिस्तान के परमाणु ताक़त के दर्जे को ख़त्म कराना चाहते हैं.

नाज़ुक वक़्त
 हम एक बहुत ही नाज़ुक दौर से गुज़र रहे हैं और हमारे शासकों को देश को इस संकट उबारने के लिए बहुत एहतियात से क़दम उठाने चाहिए.
जंग

रावलपिंडी से प्रकाशित होने वाले 'जंग' अख़बार का कहना है कि पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में उठे मौजूदा विवाद से अनेक मुद्दों पर असर पड़ेगा जिनमें भारत के साथ पाकिस्तान के दोस्ताना माहौल बनने का मुद्दा भी शामिल है.

"हमें अपनी परमाणु क्षमता ख़त्म करने के लिए बनने वाले दबावों और ख़तरों को भी नज़र अंदाज़ नहीं करना चाहिए."

अख़बार लिखता है, "हम एक बहुत ही नाज़ुक दौर से गुज़र रहे हैं और हमारे शासकों को देश को इस संकट उबारने के लिए बहुत एहतियात से क़दम उठाने चाहिए."

द न्यूज़ इंटरनेशनल लिखता है कि यह विश्वास करना मुश्किल है कि कोई यह दावा कैसे कर सकता है कि परमाणु तकनीक किसी देश को देना राष्ट्रीय हित में हो सकता है.

"डॉक्टर क़दीर ख़ान ने देश की महान सेवा की है और इसके लिए उन्हें सज़ा के बजाय सम्मान मिलना चाहिए क्योंकि उन्होंने जो कुछ भी किया वह एक अच्छे उद्देश्य के लिए किया."

द नेशन लिखता है कि डॉक्टर क़दीर ख़ान के मामले में सरकार का रुख़ आम लोगों की नज़र में भरोसे से बाहर होता जा रहा है जो ख़ान को राष्ट्रीय हीरो मानते हैं.

"अगर परमाणु प्रसार में सरकार का हाथ रहा है तो वैज्ञानिकों को अलग करके बलि का बकरा कैसे बनाया जा सकता है."

भारत

हिंदू अख़बार ने अपने संपादकीय में लिखा है कि डॉक्टर क़दीर ख़ान ने पाकिस्तान को परमाणु क्षमता देने के लिए चोरी की, तस्करी की और झूठ बोला. अगर इस मामले की अंतरराष्ट्रीय जाँच हो तो बहुत कुछ बाहर आने की संभावना है. परमाणु क्षमता वाले अनेक देशों पर भी सवाल उठ सकते हैं.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने एक विश्लेषण छापा है कि पाकिस्तान के मौजूदा परमाणु संकट से अमरीका के साथ उसके आर्थिक रिश्तों पर असर पड़ सकता है.

अख़बार ने लिखा है कि राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने पिछले साल जून में राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को जो तीन अरब डॉलर का आर्थिक देने का वादा किया था वह ख़तरे में पड़ सकता है.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने लिखा है कि अमरीकी क़ानूनों के मुताबिक़ परमाणु प्रसार में शामिल किसी भी देश के ख़िलाफ़ ख़ुद ब ख़ुद आर्थिक प्रतिबंध लगाने की व्यवस्था है.

अमरीका

वाशिंगटन पोस्ट अख़बार ने लिखा है कि एक तरफ़ अमरीका इराक़ में महाविनाश के हथियारों की तलाश कर रहा है दूसरी तरफ़ पाकिस्तान से परमाणु प्रसार का बहुत नाज़ुक मामला सामने आया है.

पाकिस्तान पिछले क़रीब 15 साल से विवादास्पद देशों को परमाणु तकनीक देता रहा जबकि राष्ट्रपति बुश काफ़ी पहले ही यह ऐलान कर चुके हैं कि परमाणु तकनीक का प्रसार करने वाले देश पर एहतियात के तौर पर ही हमला किया जा सकता है.

अख़बार का कहना है कि अमरीका ने पिछले क़रीब दो साल से परवेज़ मुशर्रफ़ को गले से लगा रखा है और वहाँ लोकतंत्र के दमन की उनकी नीतियों को नज़रअंदाज़ करता रहा है.

"अब अमरीकी सरकार को देखना चाहिए कि पाकिस्तान के सैनिक नेतृत्व ने अमरीका और दुनिया की सुरक्षा को महाविनाश के हथियारों के साथ गंभीर ख़तरा पैदा किया है, अल क़ायदा या सद्दाम हुसैन से भी कहीं ज़्यादा."

इससे जुड़ी ख़बरें
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>