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मंगलवार, 23 दिसंबर, 2003 को 17:02 GMT तक के समाचार
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सम्मान के शिखर से पतन तक
अब्दुल क़दीर ख़ान
अब्दुल क़दीर ख़ान को राष्ट्रनायक का दर्जा हासिल है
डॉक्टर अब्दुल क़दीर ख़ान को पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम का जनक कहा जाता है और उनकी छवि एक राष्ट्रनायक की रही है.

डॉक्टर क़दीर ख़ान दिसंबर 2003 में उस समय विवादों के घेरे में आए जब ईरान को परमाणु हथियारों की जानकारी लीक करने के आरोपों के सिलसिल में उनसे पूछताछ की गई.

अब डॉक्टर क़दीर ने स्वीकार कर लिया कि उन्होंने ईरान, लीबिया और उत्तर कोरिया को परमाणु तकनीक लीक की थी.

डॉक्टर क़दीर ख़ान ने राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ से मुलाक़ात के बाद पाकिस्तान टेलिविज़न पर पूरी ज़िम्मेदारी क़बूल की और आम माफ़ी की अपील भी कर डाली.

परवेज़ मुशर्रफ़ ने इस बारे में फ़ैसला सरकार पर छोड़ दिया और गुरूवार पाँच फ़रवरी को मंत्रिमंडल ने राष्ट्रपति से सिफ़ारिश कर दी कि डॉक्टर क़दीर ख़ान को माफ़ी दे दी जाए.

इस सिफ़ारिश पर राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने डॉक्टर अब्दुल क़दीर ख़ान को आम माफ़ी दे दी.

सेवाएं

डॉक्टर अब्दुल क़दीर ख़ान ने पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और 1998 में हुए परमाणु परीक्षण का श्रेय भी उन्हें ही दिया गया.

मार्च 2001 में उन्हें पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ का वैज्ञानिक सलाहकार नियुक्त किया गया था लेकिन शनिवार एक फ़रवरी 2004 को इस पद से उन्हें हटा दिया गया था.

डॉक्टर ख़ान का जन्म 1935 में भोपाल के एक साधारण परिवार में हुआ था.

वह 1947 में विभाजन के फ़ौरन बाद नहीं, बल्कि 1952 में पाकिस्तान गए.

कराची विश्वविद्यालय के बाद वे आगे की पढ़ाई के लिए जर्मनी और बेल्जियम गए.

परमाणु प्रयोगशाला

1970 के दशक में पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय यूरेनियम प्रयोगशाला में काम किया जिसका नाम यूरेन्को था.

पाकिस्तान का परमाणु मिसाइल ग़ौरी

यह ब्रितानी, डच और जर्मन कंपनियों की साझा प्रयोगशाला थी.

लेकिन 1976 में ज़ुल्फिकार अली भुट्टो के कहने पर डॉक्टर ख़ान पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम में शामिल होने के लिए स्वदेश लौट आए.

शुरू के वर्षों में डॉक्टर ख़ान ज़ोर देते रहे कि उनका परमाणु कार्यक्रम हथियारों के लिए नहीं है, लेकिन 1998 के परीक्षणों के बाद उन्होंने कहा, "मेरे दिमाग़ में कभी शक नहीं था कि हम बम बना रहे हैं, हमें बम तो बनाना ही था."

इसके बाद वे पाकिस्तान के मिसाइल कार्यक्रम की देखरेख में लग गए, उनके नेतृत्व में पाकिस्तान ने ग़ौरी मिसाइलों का परीक्षण किया जो परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता से लैस हैं.

सज़ा

1983 में नीदरलैंड की एक अदालत ने उन्हें उनकी ग़ैरहाज़िरी में चार वर्ष कारावास की सज़ा सुनाई, उन पर परमाणु तकनीक की चोरी करने का आरोप लगा था.

लेकिन बाद में उनकी अपील पर यह सज़ा रद्द कर दी गई.

कहूटा उनका मुख्य कार्यस्थल रहा है जहाँ ख़ान रिसर्च लेबोरेट्रीज़ में पाकिस्तान के ज़्यादातर परमाणु हथियार तैयार हुए हैं.

ख़ान रिसर्च लेबोरेट्रीज़ हमेशा से अमरीकी शक के दायरे में रही हैं. अमरीका ने इस प्रयोगशाला के साथ सहयोग पर प्रतिबंध भी लगा दिया था क्योंकि उसे शक था कि यहीं से उत्तर कोरिया को परमाणु तकनीक मिली थी.

पाकिस्तान में डॉक्टर अब्दुल क़दीर ख़ान का क़द इतना ऊँचा है रहा कि ईरान को तकनीक लीक किए जाने के मामले में उनसे हुई शुरुआती पूछताछ को सिर्फ़ बातचीत बताया जा रहा था.

समाचार माध्यमों में छपी ख़बरों का खंडन करते हुए सरकार ने कहा था कि डॉक्टर ख़ान पर कोई रोकटोक नहीं लगाई गई.

उन्होंने पाकिस्तान की एक वेबसाइट को दिए गए एक इंटरव्यू में कहा था, "मुझे अपने देश और अपने काम पर गर्व है, इसने पाकिस्तान के लोगों को सुरक्षा दी है और यह महान वैज्ञानिक उपलब्धि है."

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