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सोनिया पर गठबंधन की ज़िम्मेदारी
भारत में इस वर्ष होनेवाले लोकसभा चुनाव के लिए कमर कसते हुए मुख्य विपक्षी दल कॉंग्रेस ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है. ये समिति समान विचारधारा वाली अन्य पार्टियों के साथ तालमेल की संभावनाओं की तलाश करेगी. बुधवार को दिल्ली में पार्टी की कार्यसमिति की बैठक में ये फ़ैसला किया गया. जिन पार्टियों से गठबंधन की कोशिश की जाएगी उनमें शरद पवार के नेतृत्व वाली पार्टी राष्ट्रवादी काँग्रेस पार्टी भी होगी.
यह पूछे जाने पर कि समान विचारधारा वाली पार्टियों को एक झंडे तले लाना कितना आसाना होगा, सोनिया गाँधी ने कहा, "मुश्किलें तो हैं, मुश्किलें तो आती ही हैं मगर मैं इनका सामना करने के लिए तैयार हूँ." बातचीत कार्यसमिति की बैठक में यह तय हुआ कि पार्टी के बड़े नेता विभिन्न राज्यों में जाकर क्षेत्रीय पार्टियों से गठबंधन के सिलसिले में बातचीत करेंगे. इसी के तहत गुरूवार को पार्टी नेता मनमोहन सिंह तमिलनाडु जा रहे हैं जहाँ वे विपक्षी पार्टी डीएमके के अध्यक्ष एम करूणानिधि से मिलेंगे. सोनिया गाँधी के नेतृत्व में चुनाव प्रबंधन समिति के गठन के अतिरिक्त विभिन्न मुद्दों पर अलग-अलग उप समितियाँ बनाई गई हैं. प्रणब मुखर्जी समिति पिछले महीने विधानसभा चुनाव में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ से सत्ता हाथ से निकल जाने के बाद काँग्रेस के अन्य दलों से गठबंधन की अटकलें चल पड़ी थीं. चुनाव नतीजे आने के बाद पार्टी ने वरिष्ठ नेता प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था जिसने समीक्षा के बाद अपनी सिफ़ारिशें सौंपी थीं. सिफ़ारिशों के बारे में स्पष्ट तौर पर तो कुछ नहीं बताया गया था मगर ऐसा कहा जा रहा था कि इसमें 30 जनवरी तक सत्ताधारी राष्ट्रीय जनताँत्रिक गठबंधन के ही समान एक गठबंधन बनाने का सुझाव दिया गया था. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार प्रणब मुखर्जी से जब यह पूछा गया कि क्या कार्यसमिति ने उनकी सिफ़ारिशें स्वीकार कर ली हैं तो उन्होंने कहा कि उनमें से 'कुछ' को स्वीकार किया गया है. |
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