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मुशर्रफ़ को मिली संसद की हरी झंडी
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ 2007 तक देश के ग़ैर निर्वाचित राष्ट्रपति बने रह सकेंगे. संसद के दोनों सदनों और चारों प्रांतों की असेंबलियों ने उन्हें इसके लिए हरी झंडी दे दी है. परवेज़ मुशर्रफ़ के भविष्य पर गुरूवार को विश्वास मतदान हुआ जिसमें मुशर्रफ़ ने विश्वास मत हासिल किया. पाकिस्तान की धर्मनिरपेक्ष मुख्य विपक्षी पार्टी ने मतदान का बहिष्कार किया जबकि इस्लामी पार्टियाँ सदन से अनुपस्थित रहीं. इस सप्ताह देश के संविधान में ये संशोधन किया गया कि अगर वे मतदान में 50 प्रतिशत विश्वास मत भी हासिल कर लेते हैं तो वे "निर्वाचित" समझे जाएँगे. पाकिस्तान के इतिहास में किसी अनिर्वाचित राष्ट्रपति के इस तरह विश्वास मत हासिल कर एक संवैधानिक प्रमुख बनने की ये पहली मिसाल है. 1999 में तख्तापलट के बाद सत्ता हासिल करनेवाले परवेज़ मुशर्रफ़ ने 2001 में ख़ुद को राष्ट्रपति घोषित कर दिया था. विरोध
राष्ट्रपति मुशर्रफ़ की आलोचना करती रहीं पाकिस्तान की कुछ मुख्य इस्लामी पार्टियों ने मतदान के समय सदन से बाहर रहकर एक तरह से मुशर्रफ़ का साथ ही दिया. उन्होंने ये क़दम राष्ट्रपति के साथ हुए इस समझौते के बाद उठाया कि वे 2004 के अंत तक सेना से इस्तीफ़ा दे देंगे. मगर दूसरी प्रमुख विपक्षी पार्टियों ने इस समझौते की तीखी आलोचना की और विश्वास मत हासिल करने की प्रक्रिया को पाखंड बताया. पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग के प्रवक्ता सादिक़ अल फ़ारूख़ ने संविधान में हाल ही में किए गए संशोधनों कों संसदीय व्यवस्था के विरूद्ध बताया. उन्होंने कहा,"सारे महत्वपूर्ण अधिकार राष्ट्रपति को दे दिए गए हैं. प्रधानमंत्री के पास कोई शक्ति नहीं रह जाएगी और संसद बस एक रबर स्टांप बनकर रह जाएगी". नए संशोधन के तहत राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट की मंज़ूरी लेकर संसद भंग कर सकते हैं और प्रधानमंत्री को बर्ख़ास्त कर सकते हैं. नए मुख्य न्यायाधीश संविधान संशोधन को मंज़ूरी दिए जाने के बाद राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने सुप्रीम कोर्ट के लिए नए मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की. उन्होंने नाज़िम हुसैन सिद्दिक़ी की सुप्रीम कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया है.. सिद्दिक़ी तीन साल पहले सुप्रीम कोर्ट के उन जजों के पैनल में शामिल थे जिसने मुशर्रफ़ के सत्तापलट को विपक्षी दलों की चुनौती के ख़िलाफ़ फ़ैसला दिया था. सुप्रीम कोर्ट के दो अन्य जजों ने सिद्दिक़ी की नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं. |
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