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शुक्रवार, 12 दिसंबर, 2003 को 10:38 GMT तक के समाचार
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साझा मुद्रा भी संभव: वाजपेयी
अटल बिहारी वाजपेयी
वाजपेयी ने आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर ज़ोर दिया

प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने दक्षिण एशिया में विद्वेष ख़त्म कर शांति को बढ़ावा देने की अपील की है.

वाजपेयी ने कहा कि अगर इस क्षेत्र के देशों में आर्थिक सहयोग और भरोसा बढ़ा तो वह दिन दूर नहीं जब रक्षा मामलों पर सहयोग बढ़ेगा, सीमाएँ खुल जाएँगी और साझा मुद्रा भी संभव हो सकती है.

नई दिल्ली में अंग्रेज़ी अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स द्वारा आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन का उदघाटन करते हुए वाजपेयी ने कहा कि शीत युद्ध के बाद अब देश क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर ध्यान देने लगे हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस दौरान राजनीतिक मतभेदों को सुलझा लिया गया या फिर इसे किनारे कर दिया गया है.

वाजपेयी ने कहा, "दुनिया में संघर्ष का स्थान सहयोग ने ले लिया है. क्योंकि बातचीत से मतभेद को कम करने में मदद मिलती है. अब यह स्पष्ट हो गया है कि विद्वेष से अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है, व्यापार रुक जाता है और विकास की प्रक्रिया पटरी से उतर जाती है."

'पीस डिविडेंड- प्रोग्रेस फ़ॉर इंडिया एंड साउथ एशिया' विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो, अमरीका की पूर्व विदेश मंत्री मैडलिन अलब्राइट के साथ-साथ कई केंद्रीय मंत्री और कई देशों के दूत हिस्सा ले रहे हैं.

सकारात्मक क़दम

प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने देशों के लोगों के बीच बढ़ रहे संपर्क का हवाला देते हुए कहा कि इससे पता चलता है कि आम जनता भी आपसी सदभाव चाहती है.

सम्मेलन में बेनज़ीर भुट्टो भी हिस्सा ले रही हैं

वाजपेयी को अगले महीने दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन यानी सार्क शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पाकिस्तान जाना है.

इससे पहले प्रधानमंत्री के इस बयान को सकारात्मक पहल माना जा रहा है.

वैसे भारत और पाकिस्तान ने हाल के दिनों में शांति स्थापित करने की दिशा में कई पहल किए हैं.

दोनों देशों के बीच कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर युद्धविराम भी चल रहा है.

वाजपेयी ने दोनों देशों की पहल का जिक्र करते हुए कहा, "हम महसूस कर सकते हैं कि इन क़दमों का आम जनता पर कितना सकारात्मक असर पड़ा है."

उन्होंने कहा, "भारत और पाकिस्तान के सांसद, व्यापारी, कलाकार और खिलाड़ियों का एक-दूसरे के देशों में आना-जाने से यह स्पष्ट हो जाता है कि आम जनता कितनी शिद्दत से सदभाव चाहती है."

वाजपेयी ने कहा, "हमें लोगों की इस भावना की कद्र करते हुए शांति को बढ़ावा देने और विद्वेष ख़त्म करने की दिशा में हरसंभव कोशिश करनी चाहिए."

मुक्त व्यापार

प्रधानमंत्री ने दक्षिण एशियाई देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर ज़ोर दिया.

 दुनिया में संघर्ष का स्थान सहयोग ने ले लिया है. क्योंकि बातचीत से मतभेद को कम करने में मदद मिलती है. अब यह स्पष्ट हो गया है कि विद्वेष से अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है, व्यापार रुक जाता है और विकास की प्रक्रिया पटरी से उतर जाती है

अटल बिहारी वाजपेयी

उन्होंने कहा, "आपस में आर्थिक सहयोग से भरोसा बढ़ाने में मदद मिलेगी और संदेह का वातावरण ख़त्म होगा."

वाजपेयी ने कहा कि अगर मुक्त व्यापार के लिए रास्ते खोल दिए गए तो काला बाज़ारी और ग़ैर क़ानूनी व्यापार पर रोक लगाया जा सकेगा.

प्रधानमंत्री ने कहा, "हम आपस में मिलकर तस्करी, मादक दवाइयों की तस्करी और कई अपराधों से निपट सकते हैं. क्योंकि ये सारे अपराध आपसी प्रतिद्वंद्विता और समन्वय न होने के कारण ही बढ़ते हैं."

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