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'भारत के साथ बातचीत में मुझे भी शामिल करें'
पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ पाकिस्तान की ओर से होने वाली किसी भी बातचीत में शामिल होना चाहती हैं. उन्होंने राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ से माँग की है कि उनके साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ को भी इस बातचीत में शामिल किया जाना चाहिए. बीबीसी उर्दू सेवा से बातचीत में बेनज़ीर भुट्टो ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच विवादों के हल के लिए होने वाली कोई भी बातचीत तभी सार्थक हो सकती है जब दोनों पूर्व प्रधानमंत्री भी उसमें शामिल किए जाएँ. भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रही बेनज़ीर भुट्टो पिछले चार वर्ष से निर्वासन का जीवन बिता रही हैं. दूसरी ओर दिसंबर 2000 में परवेज़ मुशर्रफ़ के नेतृत्व वाली सरकार का साथ एक समझौते के तहत पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ पाकिस्तान छोड़कर सऊदी अरब चले गए थे. दोनों ही नेता देश के हालात का दोष सेना पर डालते हैं मगर सेना के अनुसार राजनेताओं ने राजनीति को दूषित और भ्रष्ट कर दिया है. मुशर्रफ़ के शासन में पारित एक क़ानून के अनुसार दोनों ही नेता न तो पाकिस्तान लौट सकते हैं और न ही चुनाव लड़ सकते हैं. 'सच्चा नेतृत्व' भुट्टो का कहना था कि बतौर प्रधानमंत्री उन्होंने और शरीफ़ ने भारत के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिशें लगातार की हैं. उनका कहना था कि पाकिस्तान की मौजूदा सरकार इस अहम मौके पर पाकिस्तान के 'सच्चे नेतृत्व' को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकती. प्रधानमंत्री वाजपेयी इस बात की पुष्टि कर चुके हैं कि वह पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाली सार्क की बैठक में हिस्सा लेंगे. साथ ही उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री मीर ज़फ़रूल्ला ख़ान जमाली से मिलने की संभावना से भी इनकार नहीं किया है. भुट्टो ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से की गई युद्ध विराम की घोषणा के बाद दोनों ही देशों के बीच रिश्ते सुधरने की उम्मीद जगी है मगर क्या ये पहल विदेशी दबाव में की गई है या फिर ये एक सोचा समझा क़दम है. उन्होंने इस बात पर अफ़सोस जाहिर किया कि ऐसे मसलों पर पाकिस्तान की संसद को विश्वास में नहीं लिया जाता. |
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