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बेनज़ीर को भ्रष्टाचार मामले में राहत
पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो और उनके पति आसिफ़ अली ज़रदारी को उनके ख़िलाफ़ स्विटज़रलैंड मे चल रहे भ्रष्टाचार के एक मामले में कुछ राहत मिली है. पूर्व प्रधानमंत्री भुट्टो के एक प्रवक्ता के अनुसार स्विटज़रलैंड की एक अदालत ने उनकी अपील स्वीकार कर ली है और उन्हें सुनाए गए छह महीने की कैद के फ़ैसले को रद्द कर दिया है. लेकिन उनका ये भी कहना है कि मामला अभी जारी है और अब स्विस अधिकारियों को ये तय करना होगा कि वे मामले को उच्च अदालत में ले जाना चाहते हैं या नहीं. ये मामला बेनज़ीर भुट्टो के 1993-96 के कार्यकाल के दौरान एसजीएस कंपनी को एक ठेका देने का है. उधर पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियों ने पूर्व प्रधानमंत्री भुट्टो के पति आसिफ़ अली ज़रदारी की तत्काल रिहाई की माँग की है.
वे पिछले सात साल से जेल में हैं और उनकी रिहाई की माँग को लेकर पाकिस्तान में कई जगह रैलियाँ और बैठकें भी हुई हैं. आयात-निर्यात का मामला जब बेनज़ीर भुट्टो 1993-96 में प्रधानमंत्री थीं तो एसजीएस कंपनी को ठेका दिया गया कि वह पाकिस्तान में आयात या वहाँ से हो रहे निर्यात का निरीक्षण करे. उसे ये भी कहा गया था कि निरीक्षण करने के बाद वह उन वस्तुओं की कीमत का अनुमान बताए ताकि उन पर शुल्क लगाया जा सके. इस पूरे मामले में आरोप ये लगे कि भुट्टो और ज़रदारी को 'कमीशन' मिले. काली कमाई को सफ़ेद करने के आरोपों पर पाँच साल चली जाँच के बाद स्विटज़रलैंड की अदालत ने भुट्टो और उनके पति ज़रदारी को भ्रष्टाचार का दोषी पाया था. स्विस अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो और उनके पति को छह महीने की सज़ा सुनाई थी और पचास हज़ार डॉलर का जुर्माना भी लगाया था. लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो और उनके पति आसिफ़ अली ज़रदारी ने स्विस अदालत के फ़ैसले के बाद ज़ोर देकर कहा था कि आदेश तर्कसंगत नहीं है. उनका कहना था कि उन्हें इस मामले के बारे में सूचित नहीं किया गया और अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया नहीं गया. अब भुट्टो के वकील फ़रहतुल्ला बाबर के अनुसार, "पुलिस ट्राइब्युनल ने उनकी अपील मानते हुए छह महीने की सज़ा के फ़ैसले को रद्द कर दिया है." |
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