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इंटरपोल नेपाली विद्रोहियों के पीछे
अंतरराष्ट्रीय पुलिस एजेंसी इंटरपोल ने नेपाल के प्रमुख विद्रोही नेताओं के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी का वारंट जारी किया है. इनमें माओवादी विद्रोही नेता प्रचंड के साथ ही उनके प्रमुख सहयोगी बाबूराम भट्टराई और प्रवक्ता कृष्ण बहादुर महरा शामिल हैं. नेपाल में पिछले आठ वर्षों से विद्रोहियों ने राजतंत्र को उखाड़ फेंकने का झंडा उठा रखा है और इस दौरान हुई हिंसा में 8,000 से भी अधिक लोग मारे गए हैं. नेपाल में सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि इंटरपोल के गिरफ़्तारी के वारंट के बाद संगठन के 181 सदस्य देशों से उन्हें इन लोगों की गिरफ़्तारी में मदद मिलेगी. इंटरपोल के इस वारंट को 'रेडनोटिस' के रूप में भी जाना जाता है. 'आतंकवादी' नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव माधव कुमार नेपाल ने पिछले ही हफ़्ते इन तीनों विद्रोही नेताओं से भारत के लखनऊ शहर में मुलाक़ात की थी. कहा जा रहा है कि माओवादी नेता भारत में शरण ले रहे हैं. भारत भी इंटरपोल का सदस्य है और नेपाल की ही तरह उसने भी माओवादी विद्रोहियों को 'आतंकवादी' की श्रेणी में रखा है. भारत की केंद्रीय जाँच एजेंसी सीबीआई के प्रवक्ता ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि भारत इस वारंट के मामले में इंटरपोल का पूरा सहयोग करेगा. अधिकारी ने कहा कि इस बात की भी जाँच की जा रही है कि क्या नेपाली विद्रोही सचमुच भारत आते रहते हैं. इंटरपोल ने पहले-पहल दो साल पहले इन विद्रोही नेताओं के विरुद्ध वारंट जारी किया था और उस समय ये काम नेपाली सरकार के अनुरोध पर किया गया था. सत्रह माओवादी नेताओं को इंटरपोल की उस सूची में शामिल किया गया था. मगर जब जनवरी में सरकार और विद्रोहियों के बीच संघर्ष विराम पर सहमति हुई तो ये सूची वापस ले ली गई. इसके बाद अगस्त में युद्धविराम टूटने के बाद सरकार ने इन नेताओं को एक बार फिर 'आतंकवादी' की श्रेणी में रख दिया है और इंटरपोल से उन्हें गिरफ़्तार करने की माँग की है. |
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