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गुरुवार, 13 नवंबर, 2003 को 00:33 GMT तक के समाचार
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प्रभाकरन से मिलेंगे नॉर्वे के मध्यस्थ
प्रभाकरन
तमिल विद्रोहियों के नेता वेलुपिल्लई प्रभाकरन से मिलेंगे नॉर्वे के वार्ताकार

नॉर्वे के मध्यस्थों का एक दल तमिल विद्रोही नेता वेलुपिल्लई प्रभाकरन से मिलने वाला है.

इस दल की कोशिश सरकार के साथ बातचीत के नए दौर की तारीख़ें तय करने की होगी.

श्रीलंका में राजनीतिक संकट के बाद से तमिल विद्रोहियों के साथ चल रही शांति वार्ता को लेकर असमंजस बना हुआ है.

ये मध्यस्थ श्रीलंका में विद्रोहियों के नियंत्रण वाले पूर्वोत्तर के हिस्से में उस समय जा रहे हैं जबकि राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा और प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे के बीच चल रहे सत्ता संघर्ष का हल निकालने के लिए दोनों के बीच मंगलवार को हुई बैठक विफल हो गई.

इससे पहले नॉर्वे के प्रतिनिधियों ने मंगलवार को प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे से मुलाक़ात की थी और बुधवार को उनका राष्ट्रपति कुमारतुंगा से मिलने का कार्यक्रम है.

तमिल विद्रोहियों के संगठन एलटीटीई के एक वरिष्ठ नेता ने कहा है कि गुरूवार को उनके नेता प्रभाकरन नॉर्वे के विदेश उपमंत्री विदर हेलगेसन से मिलेंगे.

विद्रोहियों के बातचीत के लिए राज़ी होने से माना जा रहा है कि वे देश के मौजूदा राजनीतिक संकट को गंभीरता से ले रहे हैं.

इससे ये उम्मीद भी बंधी है कि वे फिर से संघर्ष को रोकने और शांति प्रक्रिया को जारी रखने के लिए हरसंभव प्रयास करना चाहते हैं.

मध्यस्थों के इस दल में हेलगेसन के साथ ही नॉर्वे के विशेष दूत इरिक सोल्हेम भी शामिल हैं.

दोनों नेता अगले सप्ताह फिर मुलाक़ात करेंगे जिसमें दूसरे राजनीतिक दलों के भी नेता मौजूद रहेंगे.

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मिले

श्रीलंका में पिछले सप्ताह राजनीतिक संकट शुरू होने के बाद राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच पहली बार बातचीत हुई है.

कुमारतुंगा और विक्रमसिंघे
कुमारतुंगा और विक्रमसिंघे के बीच हुई बैठक विफल रही

तमिल विद्रोहियों के साथ शांति प्रक्रिया पर विक्रसिंघे सरकार से मतभेद के बाद राष्ट्रपति ने पिछले सप्ताह तीन मंत्रियों को बर्ख़ास्त करने के साथ-साथ संसद को निलंबित कर दिया था.

इसके बाद राष्ट्रपति ने एक साझा राष्ट्रीय सरकार बनाए जाने का प्रस्ताव रखा जिसके बारे में बातचीत के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री को आमंत्रित किया.

लेकिन प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे ने कहा है कि बातचीत में शांति प्रक्रिया को जारी रखने के मुद्दे को प्राथमिकता देनी चाहिए.

नॉर्वे के मध्यस्थ वैसे तो दोनों पक्षों के बीच बातचीत फिर शुरू करवाने के लिए आए थे मगर मौजूदा परिस्थितियों में ये दौरा राजनीतिक संकट को सुलझाने में कारगर हो सकता है.

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