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'अफ़ग़ानिस्तान में नैटो और सैनिक भेजे' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने नैटो के सदस्य देशों से अफ़ग़ानिस्तान में और ज़्यादा सैनिकों को भेजने की अपील की है. उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नैटो) के बुधवार से रोमानिया में हो रहे सम्मेलन के शुरु होने से पहले बुकारेस्ट में उन्होंने कहा - "हम अफ़ग़ानिस्तान में हार बर्दाश्त नहीं कर सकते...हमें जीतना ही होगा. यदि हम आतंकवादियों को अफ़ग़ानिस्तान में नहीं हराएँगे तो हमें उनका सामना अपने देश में करना होगा." रोमानिया और फ्रांस ज़ल्द ही कुछ और सैनिकों को अफ़ग़ानिस्तान भेजने वाले हैं. बुश ने अन्य देशों से भी इस बारे में क़दम उठाने को कहा है. अफ़ग़ानिस्तान में नैटो के क़रीब 47 हज़ार सैनिक मौजूद हैं और वहाँ तैनात कमांडरों ने कहा है कि दस हज़ार अतिरिक्त सैनिकों की ज़रूरत है. नैटो की सदस्यता संभावना है कि सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति बुश नैटो की सदस्यता को यूरोप के अन्य देशों के लिए भी खुला रखने पर जोर दे सकते हैं जो नैटो से जुड़ने की इच्छा रखते हैं. राष्ट्रपति बुश ने कहा है कि 'सर्कल ऑफ़ फ़्रीडम' यानी 'आज़ादी के दायरे' उधर नैटों में अन्य देशों को आमंत्रित करने के बारे में उनका कहना था कि अल्बानिया, क्रोएशिया और मैसिडोनिया को नैटो के सदस्य बनने का न्योता दिया जाएगा. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि नैटो अब ऐसा गठबंधन नहीं है जो रूस के ख़िलाफ़ है. पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस सम्मेलन में दो प्रमुख मुद्दे हैं - सोवियत संघ के सदस्य रहे देशों का नैटो में आना - जिसका रूस और कुछ नैटो सदस्य देश विरोध कर रहे हैं और अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान को हराने के लिए नैटो फ़ौजों का समर्थन जुटाना. | इससे जुड़ी ख़बरें 'नाकामी के गंभीर नतीजे हो सकते हैं'07 फ़रवरी, 2008 | पहला पन्ना 'नैटो को तालेबान से निपटना होगा'18 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना 'अफ़ग़ानिस्तान के कारण नैटो पर ख़तरा'07 फ़रवरी, 2008 | पहला पन्ना अफ़ग़ानिस्तान में संकट नहीं: नैटो08 फ़रवरी, 2008 | पहला पन्ना नैटो को मिला नया मक़सद11 अगस्त, 2003 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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