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मज़बूत होते भारत-इसराइल रिश्ते | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीहरिकोटा से 300 किलो वज़न के पोलेरिस उपग्रह को अंतरिक्ष में छोड़ने से भारत और इसराइल के सैन्य रिश्तों में एक नया मोड़ आया है. इसराइल के साथ राजनयिक संबंध शुरू करने के 14 साल बाद इसराइल अब भारत को सैनिक साजो-सामान बेचने में रूस के बाद दूसरे नंबर पर आ गया है. पोलेरिस उपग्रह को छह महीने पहले छोड़ा जाना था लेकिन ख़बरें हैं कि अमरीका के दबाव में भारत ने इसके प्रक्षेपण में देरी की. अमरीका को इस बात की चिंता थी कि इस जासूस उपग्रह से पकिस्तान की तस्वीरें भी इसराइल भारत को देगा. यह उपग्रह रात के अंधेरे में भी साफ़ और बेहतरीन तस्वीरें लेने की क्षमता रखता है. आख़िरकार अमरीका ने पोलेरिस के प्रक्षेपण को स्वीकृति दे दी. अब भारत को इस उपग्रह की तस्वीरें मिलेंगीं. मज़बूत होते रिश्ते भारत और इसराइल के बीच सैन्य रिश्ते बहुत मज़बूत हैं.
अगले पाँच वर्षों में भारत सेना की तीनों अंगों के आधुनिकीकरण पर करीब 40 अरब डॉलर ख़र्च करेगा. इसराइल चाहता है कि वो भारत को ज़्यादा से ज़्यादा हथियार बेचे. जनवरी के पहले सप्ताह में नौसेना अध्यक्ष एडमिरल सुरेश मेहता इसराइल के दौरे पर गए थे. ख़बर है कि दोनों देश नौसेना के लिए बारक मिसाइल सुरक्षा व्यवस्था बनाने पर चर्चा कर रहे हैं. अब तक भारत सैन्य सामग्री सीधे इसराइल से खरीदता है. भारत सरकार का प्रस्ताव है कि तकनीकी स्थानांतरण के बाद इसराइली कंपनियाँ रक्षा क्षेत्र में भारतीय सार्वजनिक कंपनियों के साथ मिलकर सैन्य सामग्री बनाएँ. इस समय हेलिकॉप्टर पर मानवरहित आकाशीय यान यानि यूएवी के माध्यम से तस्वीरें खींचने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हो रही है. इस यंत्र से किसी सैनिक की जान ख़तरे में डाले बिना ही दुश्मन के क्षेत्र की तस्वीरें ली जा सकती हैं. इस समय थल सेना पाकिस्तान से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा के क्षेत्र और उत्तर पूर्वी राज्यों से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा के क्षेत्र में इसका उपयोग कर रहा है. फ़ाल्कन राडार व्यवस्था जानकारों का कहना है कि जम्मू और कश्मीर में तैनात विशेष बलों के दस्तों के विशेष कपड़ों, हथियारों और रात में सैनिकों के साफ़ देख सकने के लिए विशेष उपकरणों की ख़रीद पर भी बातचीत चल रही है.
भारत को इसराइल पहले ही तीन ‘फ़ाल्कन राडार व्यवस्था’ बेचने पर राज़ी हो गया है. अमरीका के दबाव में इसराइल ने सन् 2000 में चीन को यह उपकरण बेचने से इनकार कर दिया था. दिलचस्प है कि ‘फ़ाल्कन राडार व्यवस्था’ में रूस भी शामिल है. रूस के जहाज़ पर इसराइल का ‘फ़ाल्कन राडार व्यवस्था’ लगाई जाएगी तो विमान राडार की पहुँच से दूर उड़कर भी पृथ्वी की तस्वीरें ले सकता है. पिछले साल तत्कालीन थलसेना प्रमुख जेजे सिंह इसराइल के दौरे पर जाने वाले पहले सेना अध्यक्ष बने थे. जहाँ सैनिकों को बेहतरीन साजोसामान उपलब्ध कराये जाने पर बात हुई. हालांकि वामपंथियों के दबाव में विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी को पिछले साल अपना इसराइल दौरा रद्द करना पड़ा था. दोनों देशों के बीच सैन्य रिश्ते धीरे-धीरे मज़बूत होते गए हैं. सन् 1994 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंह राव ने इसराइल के साथ राजनयिक रिश्ते स्थापित किए थे. भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक मोर्चे ने भी इसराइल के साथ सैन्य रिश्ते बनने में अहम भूमिका निभाई. पिछले चार साल में कांग्रेस के नेतृत्व में संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा ने इस परंपरा को आगे ही बढ़ाया है. | इससे जुड़ी ख़बरें भारत से इसराइली उपग्रह का प्रक्षेपण21 जनवरी, 2008 | विज्ञान इसराइली टैंक ग़ज़ा में घुसे11 दिसंबर, 2007 | पहला पन्ना 'अमरीका इसराइल को सैन्य मदद बढ़ाएगा'29 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना इसराइल ने गज़ा में मिसाइल दागे07 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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