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अमरीका दौरे से नाख़ुश चीन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चीन ने अमरीका से ज़ोरदार शब्दों में कहा है कि वह तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा की प्रस्तावित अमरीका यात्रा के लिए किए गए इंतज़ाम रद्द कर दे क्योंकि अगर लामा यह यात्रा करते हैं तो दोनों देशों के संबंधों पर बड़ा असर पड़ सकता है. ऐसी ख़बरें हैं कि दलाई लामा की इस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति जॉर्ज बुश व्हाइट हाउस में उनका स्वागत करेंगे. राष्ट्रपति जॉर्ज बुश बुधवार को ऐसे एक समारोह में शामिल होंगे जिसमें दलाई लामा को अमरीका का शीर्ष नागरिक सम्मान - कांग्रेसनल गोल्ड मैडल दिया जाएगा. यह पहला मौक़ा होगा जब राष्ट्रपति बुश 72 वर्षीय बौद्ध नेता दलाई लामा के साथ किसी सार्वजनिक समारोह में एक साथ प्रकट होंगे. उससे पहले मंगलवार को राष्ट्रपति बुश व्हाइट हाउस में दलाई लामा से मुलाक़ात करेंगे और जनवरी 2001 में राष्ट्रपति बनने के बाद से दलाई लामा के साथ उनकी यह तीसरी मुलाक़ात होगी. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लियू जियानशाओ ने कहा है, "हम एक बार फिर अमरीका को अपनी ग़लती सुधारने के लिए प्रेरित कर रहे हैं और वह दलाई लामा की यात्रा के इंतज़ाम रोक दे." व्हाइट हाउस ने कहा है कि वह चीन की चिंताओं को समझता है लेकिन उम्मीद भी जताई है कि चीन के नेता ये भी समझ सकें कि दलाई लामा एक ऐसे नेता हैं जो शांति चाहते हैं. 'क्रूर हस्तक्षेप' तिब्बत में चीनी अधिकारियों ने दलाई लामा को कांग्रेस सम्मान दिए जाने की घोषणा पर क्रोध व्यक्त किया है. तिब्बत कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव झांग क़िंगली ने दलाई लामा पर ग़ुस्सा जताते हुए कहा कि वह "मातृभूमि को बाँटने" की कोशिश कर रहे हैं.
झांग क़िंगली ने कहा, "हमे बहुत ग़ुस्सा आ रहा है. अगर दलाई लामा को इस तरह का सम्मान दिया जा सकता है तो दुनिया भर में कोई इंसाफ़ नहीं होगा और न ही अच्छे लोग होंगे." चीन के ख़िलाफ़ 1959 में नाकाम विद्रोह करने के बाद दलाई लामा भारत में निर्वासित जीवन बिता रहे हैं. दलाई लामा को 1989 में नोबेल शांति पुरस्कार भी मिल चुका है जिस पर चीन ने भारी नाराज़गी जताई थी. चीन का आरोप है कि दलाई लामा तिब्बत की आज़ादी की माँग करके चीन की संप्रभुता को तहस-नहस करने की कोशिश कर रहे हैं. उधर दलाई लामा तिब्बत के लिए वास्तविक स्वायत्तता की माँग कर रहे हैं और उनकी माँग में स्वतंत्रता शामिल नहीं है. चीन का दावा है कि तिब्बत सदियों से उसका हिस्सा रहा है और 1951 से तिब्बत पर उसका ही शासन है. मानवाधिकार चिंताएँ दलाई लामा सोमवार को वाशिंगटन पहुँचे थे और वहाँ उनका ज़ोरदार स्वागत किया गया. तिब्बत के लोगों ने परंपरागत वेषभूषा में नृत्य-संगीत पेश किया. हाल के समय में विश्व के कुछ नेताओं ने तिब्बत में मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों पर चिंता जताई थी. सितंबर 2007 में जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल ने भी दलाई लामा से मुलाक़ात की थी जिस पर चीन ने नाराज़गी जताई थी. दलाई लामा साल 2007 में ऑस्ट्रिया के चांसलर अलफ्रेड गुज़ेनबाउएर और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री जॉन हॉवर्ड से भी मुलाक़ात कर चुके हैं. कनाडा ने दलाई लामा को 2006 में अपनी मानद नागरिकता प्रदान की थी जिस पर चीन ने भारी नाराज़गी जताई थी. | इससे जुड़ी ख़बरें दलाई लामा चुनने में चीन की भूमिका बढ़ी01 सितंबर, 2007 | पहला पन्ना दलाई लामा से मिले प्रधानमंत्री हावर्ड15 जून, 2007 | पहला पन्ना दलितों-आदिवासियों ने बौद्ध धर्म अपनाया27 मई, 2007 | भारत और पड़ोस मुंबई में विशाल धर्मांतरण कार्यक्रम26 मई, 2007 | भारत और पड़ोस दलाई लामा की सुरक्षा बढ़ाई गई05 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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