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जापान 'परमाणु लीक' की जाँच करेगा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जापानी अधिकारियों का कहना है कि वे सोमवार को आए भूकंप के बाद परमाणु संयंत्र से रेडियोधर्मी विकिरण लीक होने की जाँच करेंगे. ख़बरें हैं कि भूकंप के दौरान परमाणु कचरे के कुछ ड्रम गिर गए थे और उनमें से कुछ के ढक्कन खुले पाए गए. यह भी पता चला है कि संयंत्र से कुछ रेडियोधर्मी पदार्थ समुद्र में बहकर चले गए थे. हालांकि टोक्यो विद्युत ऊर्जा कंपनी का कहना है कि रेडियोधर्मी पदार्थ के लीक होने से पर्यावरण को कोई ख़तरा नहीं है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि भूकंप के कारण काशीवाज़ाकी परमाणु संयंत्र को हुए नुक़सान ने जापान के परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस भूकंप से हज़ारों लोग प्रभावित हुए हैं और बड़ी संख्या में लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं. भूकंप के कारण नौ लोगों की मौत हो गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं. इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.6 मापी गई थी. भूकंप के बाद छोटी सूनामी लहरों के उठने की आशंका जताई गई थी लेकिन बाद में ये चेतावनी वापस ले ली गई. जापान को भूकंप की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है. अक्टूबर, 2004 में 6.8 तीव्रता का भूकंप आया था जिसमें 65 लोगों की मौत हो गई थी. हाल के दिनों में जापान में सबसे बड़ा भूकंप 1995 में आया था. उस समय कोबे शहर 7.3 तीव्रता वाले भूकंप से हिल गया था और उसमें 6,400 लोग मारे गए थे. | इससे जुड़ी ख़बरें 'जापान में रेडियोधर्मी पदार्थ लीक हुआ'16 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना जापान में भूकंप का तगड़ा झटका16 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना जापान में भूंकप के बाद के झटके26 मार्च, 2007 | पहला पन्ना भूकंप के दो बड़े झटके, कई हताहत25 मार्च, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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