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कनिष्क हादसा: 'उड़ान पूर्व तलाशी नहीं हुई' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कनिष्क विमान हादसे की जाँच में नया मोड़ आया है. कनाडा के एक पूर्व पुलिस अधिकारी ने कहा है कि उड़ान भरने से पहले विमान की तलाशी ठीक से नहीं हुई. जून 1985 में कनाडा से भारत आ रहे एयर इंडिया के कनिष्क विमान में बम विस्फोट हुआ था जिसमें 329 लोग मारे गए थे. उनमें से अधिकतर भारतीय मूल के कनाडाई नागरिक थे. कनिष्क विमान विस्फोट की दोबारा हो रही जाँच में सुनवाई के दौरान क्यूबेक प्रांत के पूर्व पुलिस प्रमुख सर्ज कैरिग्नन ने कहा कि मॉंट्रियल के माइराबेल हवाई अड्डे से उड़ान भरने से पहले अगर उन्हें यात्रियों के सामान की तलाशी खोजी कुत्तों से कराने का मौका मिल जाता तो हादसा टल सकता था. उन्होंने 'रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस' के उन दस्तावेज़ों से असहमति जताई जिनके मुताबिक उड़ान भरने से पहले कनिष्क विमान में रखे गए संदिग्ध सामान की तलाशी ली गई थी. कैरिग्नन ने कहा कि 22 जून 1985 की शाम उन्हें आपात संदेश मिला और उनसे कहा गया कि एक जंबो जेट और उसमें रखे गए यात्रियों के सामान की तलाशी लेनी है लेकिन जब तक वे हवाई अड्डे पर पहुँचते विमान उड़ान भर चुका था. उन्होंने कहा, "मैं हमेशा इस बात पर हैरान रहा कि अगर मुझे विमान की तलाशी लेने के लिए बुलाया गया था तो मेरे पहुँचने से पहले ही विमान को जाने की इजाज़त कैसे मिली." चेतावनी इससे पहले कनाडा के एक अधिकारी ने जाँच आयोग के सामने दावा किया था कि विमान में बम होने की चेतावनी पहले दे दी गई थी लेकिन अधिकारियों ने उस पर ध्यान नहीं दिया. इस सुनवाई में रिक क्रूक नामक एक पूर्व गुप्तचर की गवाही ली गई जो वेंकूवर पुलिस के सदस्य थे. उन्होंने गवाही में बताया था कि उनके पास इस बारे में निश्चित सूचना थी कि एयर इंडिया के कनिष्क विमान को निशाना बनाया जाएगा. उन्होंने कहा था कि उन्हें 1984 के अंत में एक ऐसे व्यक्ति से ये सूचना मिली जिसे ये उम्मीद थी कि पुलिस की मदद के बदले में उसे ज़मानत मिल जाएगी. उन्होंने कहा ये जानकारी मिलने के बाद उन्होंने कनाडा के गुप्तचर विभाग को सूचना बढ़ा दी लेकिन किसी ने भी उनसे इस बारे में कोई संपर्क नहीं किया. कनिष्क मामला कनाडा के इतिहास का सबसे लंबा और सबसे महँगा मुक़दमा है और इस मामले में दो ऐसे अभियुक्त बरी हो चुके हैं जिनपर इस हमले में मुख्य भूमिका निभाने का आरोप लगा था. लेकिन पीड़ितों के परिवारवालों ने ये आरोप लगाया कि पुलिस ने जाँच के काम में कोताही बरती जिसके बाद पिछले साल इस मामले को लेकर अधिकारियों के रवैये की जाँच शुरू की गई जिसपर कुछ महीनों में रिपोर्ट आ जाएगी. | इससे जुड़ी ख़बरें राहतकर्मियों ने अपने अनुभव बयान किए28 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना 'कनिष्क जाँच में कहाँ ग़लती हुई'24 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस ज़ख्म नहीं भरते सालों बाद भी23 जून, 2005 | पहला पन्ना कनिष्क का गवाह मुकरने लगा13 सितंबर, 2003 | पहला पन्ना कनिष्क हादसे की सुनवाई शुरू | भारत और पड़ोस कनिष्क मामले की सुनवाई खटाई में05 जुलाई, 2002 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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