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मंगलवार, 31 अक्तूबर, 2006 को 23:39 GMT तक के समाचार
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चीन में मौत की सज़ा का क़ानून कड़ा
फाँसी का फंदा
चीन दुनिया के उन देशों में सबसे आगे हैं जहाँ सबसे अधिक मौत की सज़ा दी जाती है
चीन में मौत की सज़ा के क़ानून को कड़ा किया गया है और अब मृत्युदंड पर देश की सर्वोच्च अदालत की मुहर लगनी ज़रूरी होगी.

1980 के दशक में चीन में निचली अदालतों को मृत्युदंड का हक दिये जाने के बाद न्याय में चूक होने के कई मामले सामने आए हैं.

चीन की सरकारी संवाद समिति शिन्हुआ के अनुसार मृत्युदंड के मामले में पिछले दो दशकों में यह सबसे अहम सुधार है.

माना जाता है कि दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले चीन में ज्यादा अपराधियों को सज़ा ए मौत दी जाती है.

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि वर्ष 2005 में चीन में 1770 लोगों को फाँसी पर लटकाया गया और तक़रीबन 4000 लोगों को मृत्युदंड दिया गया.

अहम फ़ैसला

कानून में इस बदलाव को देश की सर्वोच्च विधायिका ने मंज़ूरी दे दी है और यह सुधार एक जनवरी 2007 से प्रभाव में आ जाएगा.

इसका मतलब है कि निचली अदालतों के मृत्युदंड के फ़ैसले की समीक्षा की जाएगी और सुप्रीम कोर्ट से इस निर्णय की पुष्टि होना ज़रूरी होगा.

हालाँकि अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि मृत्युदंड के मामले की सुप्रीम कोर्ट में फिर से सुनवाई होगी या फिर ये प्रक्रिया सिर्फ़ निचली अदालत के दस्तावेजों की समीक्षा भर होगी.

चीन की क़ानूनी व्यवस्था के अमरीकी विशेषज्ञ जेरोम कोहेन ने इसे ‘सही दिशा में उठाया गया कदम’ बताया है.

उन्होंने कहा कि इससे साफ ज़ाहिर होता है कि चीन की सर्वोच्च न्यायपालिका मृत्युदंड के बढ़ते निर्णयों से चिंतित है.

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