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सोमवार, 03 जुलाई, 2006 को 04:28 GMT तक के समाचार
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ज़िम्बाब्वे में जादू-टोना अब वैध
ओझा
सिर्फ़ नुक़सान पहुँचाने पर पारंपरिक इलाज करने वालों को सज़ा दी जा सकेगी
एक औपनिवेशिक क़ानून को ख़त्म करते हुए ज़िम्बाब्वे ने जादू-टोने को एक बार फिर से वैधता प्रदान कर दी है.

जुलाई से सरकार सुपरनेचुरल शक्तियों या कि अलौकिक या पारलौकिक शक्तियों पर विश्वास करने लगी है लेकिन इसका उपयोग किसी को नुक़सान पहुँचाने के लिए करने पर प्रतिबंध है.

वर्ष 1899 में औपनिवेशिक सरकार ने यहाँ किसी को डायन या जादूगर कहने को अपराध की श्रेणी में रख दिया गया था.

जबकि कुछ सदियों पहले यूरोप में इसी तरह के आरोपों के बाद लोगों को ज़िंदा जला दिया जाता था.

लेकिन ज़िम्बाब्वे के ग्रामीण इलाक़ों में अब भी ये कहना बकवास की श्रेणी में आता है कि अलौकिक शक्तियाँ नहीं होतीं.

वहाँ तो जादू-टोने की कई दिलचस्प और जीवंत कहानियाँ आसानी से सुनी जा सकती हैं.

उदाहरण के तौर पर अल्फ़ेड मानते हैं कि उन पर कुछ साल पहले जादू-टोना किया गया था और इसकी वजह से वे थोड़े गंजे भी हो गए थे.

वे बताते कि किस तरह वे और उनकी पत्नी रात को खाना खाने के बाद रात में सोने की तैयारी कर रहे थे और उनके सिर के बाल उड़ गए.

वे बताते हैं, "जब मेरी पत्नी बेडरुम में आई तो तो उसने मुझे देखा और पूछा कि मेरे बालों को क्या हो गया है और वे ग़ायब कहाँ हो गए."

अल्फ़्रेड बताते हैं कि वे किस तरह सात महीनों तक परंपरागत इलाज करवाते रहे ताकि बाल फिर से उगाए जा सकें.

क़ानून

इस नए क़ानून से भविष्यवाणी से लेकर मृतकों की आत्मा से संवाद स्थापित करना वैध हो गया है.

वहीं कामोत्तेजना बढ़ाने के लिए परंपरागत दवाओं का उपयोग और कामोत्तेजक औषधियों का प्रयोग भी किया जा सकेगा.

समय और ऊर्जा दोनों की बर्बादी है. शहरी इलाक़ों में इसका कोई असर नहीं है
थॉमस डेव, समाज विज्ञानी

लेकिन इस क़ानून में कई अपरिभाषित चीज़ें भी हैं. जैसे कि कोई भी पति अपने सोने के कमरे में एक जादुई वस्तु रख सकेगा, ऐसी जादुई वस्तु जो पत्नी के बेवफ़ो होने पर उसे नुक़सान पहुँचाएगी.

समाजशास्त्री और ज़िम्बाब्वे के पारंपरिक चिकित्सकों के परिषद के प्रमुख प्रोफ़ेसर क्लॉड मरारिकी का तर्क है कि जादू-टोने के कई सकारात्मक पहलू भी हैं.

वे एक क़िस्सा बताते हैं कि कैसे एक व्यक्ति ने जादू किया हुआ सीमेंट चुराया और वो उसके कंधे से चिपक गया.

लेकिन बहुत से लोग मानते हैं कि देश जादू-टोने के बिना ज़्यादा अच्छा था.

सामाजिक विज्ञानी थॉमस डेव कहते हैं, "ये समय और ऊर्जा दोनों की बर्बादी है. शहरी इलाक़ों में इसका कोई असर नहीं है."

उनका कहना है कि जादू-टोने के दावों की जाँच की जानी चाहिए.

हालांकि ज़िम्बाब्वे के चर्च को हमेशा से भरोसा रहा है कि अलौकिक शक्तियाँ रही हैं.

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