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ख़र्राटे भरने वाले नहीं बन सकेंगे सैनिक | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चीन की सेना में अब ऐसे लोगों की नियुक्ति नहीं होगी जो सोते हुए ज़ोर ज़ोर से खर्राटे भरते है. सरकारी संवाद समिति शिन्हुआ में छपी ख़बर के अनुसार चीन की सेना ने उन लोगों की नियुक्ति पर भी प्रतिबंध लगाने का फ़ैसला किया है जो अपने शरीर पर गोदना के ज़रिए फ़ैशनेबल डिज़ाइन बनवाते हैं. रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि इस बाद की पड़ताल कैसे होगी कि कोई खर्राटे भरता है या नहीं लेकिन एक स्वास्थ्य अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि शरीर पर गोदना ( टैटू) वाले सैनिकों से " सेना की छवि ख़राब " होती है. हालांकि पारंपरिक गोदना डिज़ाइन बनवाने की अनुमति रहेगी और ऐसे लोगों की नियुक्ति भी होगी. इसके अलावा अब सेना में भर्ती के लिए ड्र्ग्स और अन्य मनोवैज्ञानिक टेस्ट भी करवाए जाएंगे. सामूहिक कष्ट बीजिंग मार्निंग पोस्ट नामक अख़बार में छपी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सेना में खर्राटों से जुड़ा नियम इसलिए बनाया जा रहा है क्योंकि किसी व्यक्ति के लगातार ख़र्राटों से समूह में रहने वालों के जीवन पर असर पड़ता है. एक अधिकारी ने नाम उजागर किए बिना शिन्हुआ से कहा है कि अब सेना में भर्ती होने वाले युवकों के पेशाब की भी जांच की जाएगी ताकि यह पता लग सके कि वो ड्र्ग्स लेते हैं या नहीं. इसी तरह मनोवैज्ञानिक परीक्षणों में लिखित परीक्षा के अलावा इंटरव्यू भी लिया जाएगा. |
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