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'बग़दाद की सड़कों पर ख़तरा है' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ पर मार्च 2003 में हुए हमले के तीन साल बाद राजधानी बग़दाद में सुरक्षा का माहौल कैसा है, इसका अंदाज़ा सड़क पर घूमने से मिल जाता है. बग़दाद शहर भी आज वैसा ही है जैसा मध्य पूर्व के किसी देश की अन्य राजधानी, व्यस्त और रंग-बिरंगे बाज़ार जो लोगों से भरे नज़र आते हैं और सड़कों पर दौड़ती मोटर गाड़ियाँ. इसके बावजूद यहाँ रोज़मर्रा की ज़िंदगी में व्यस्त नज़र आने वाले हर व्यक्ति पर देश में हिंसा में अचानक आई तेज़ी का असर ज़रूर नज़र आता है. जब अमरीकी सैनिक वाहन गुज़रते हुए नज़र आते हैं तो लोगों में एक डर देखने को मिलता है कि कहीं वे ग़लत समय पर ग़लत जगह पर नहीं पकड़े जाएँ. अमरीकी सैन्य वाहनों पर बैनर लगा होता है जिसपर लिखा होता है - सौ मीटर दूर रहिए - ख़तरनाक सैन्य बल आ रहा है. जहाँ तक अमरीकी सैनिकों का सवाल है तो उनके लिए हर गुज़रता असैन्य वाहन आत्मघाती हमलावर का वाहन हो सकता है. इसलिए आप अगर अमरीकियों को आता हुआ देखते हैं तो सीधा सा नियम है - सड़क के एक किनारे हो जाएँ, जितना दूर जा सकें उतना ही सुरक्षित है. लेकिन ऐसी भी कहानियाँ हैं कि जो सही समय पर सड़क के किनारे नहीं हुए तो उन्हें गोली खानी पड़ी. आम इराक़ियों में निजी इराक़ी सुरक्षा गार्ड यूनिटों की संख्या बढ़ने पर भी डर बढ़ रहा है क्योंकि ट्रकों में शहर में घूमते हैं और उनके कंदे पर मशीनगनें होती हैं, और अगर कोई वाहन उनके ट्रक के पास आता है तो वह उसी पर मशीनगनें तान देते हैं. किसी को भी पता नहीं है कि वे कौन लोग हैं. और उस पर तुर्रा ये कि किसी भी समय और कहीं से भी अपहरण होने का डर. औसतन लगभग 20 इराक़ियों का हर रोज़ अपहरण हो जाता है और उनमें से ज़्यादा अपहरण फिरौती के लिए होते हैं. यह संख्या अपहृत किए जाने वाले विदेशियों से कहीं ज़्यादा है. सड़कों पर इस तरह का ख़तरा और हर रोज़ रात को आठ बजे शुरू होने वाले कर्फ्यू की वजह से लोग अपने घरों से बाहर निकलने से कतराते हैं और जितना कम हो सके, बाहर निकलते हैं. मेरे एक इराक़ी दोस्त ने कहा, "हमारी कोई सामाजिक ज़िंदगी नहीं बची है, और तो और सुरक्षा हालात ने हमारे परिवारों को बाँटकर रख दिया है." एक अन्य दोस्त ने कहा, "मैंने अपने कुछ रिश्तेदारों को तो एक साल से नहीं देखा है, हालाँकि वे बग़दाद में ही रहते हैं." इसमें कोई शक नहीं कि बग़दाद में सड़कों पर निकलना ख़तरे से ख़ाली नहीं है. | इससे जुड़ी ख़बरें सद्दाम हुसैन ने सबूतों को नकारा05 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना जबरन पद से नहीं हटाया जाएगा: जाफ़री04 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना 'विद्रोह की कमान ज़रकावी के पास नहीं'03 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना 'प्रधानमंत्री बाहरी सरकारें नहीं चुनतीं'03 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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