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इंडोनेशिया में 'प्लेबॉय' का विरोध | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इंडोनेशिया में वयस्कों की पत्रिका 'प्लेबॉय' के स्थानीय संस्करण के प्रकाशन की योजना से दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देश में पोर्नोग्राफ़ी पर विवाद छिड़ गया है. इंडोनेशिया में दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी है, दूसरी ओर 'प्लेबॉय' की प्रसिद्धि वयस्क विषयों पर चर्चा और युवतियों की नंगी तस्वीरों के प्रकाशन के कारण है. इसीलिए जब से 'प्लेबॉय' के स्थानीय संस्करण के प्रकाशन की ख़बर सामने आई है राजधानी जकार्ता में प्रदर्शनों का दौर चल पड़ा है. संसद अगले कुछ महीनों में पोर्नोग्राफ़ी विधेयक पारित करने वाली है और प्रदर्शनकारी संसद पर दबाव बनाना चाहते हैं ताकि इस संबंध में सख़्त क़ानून बनाया जाए. पोर्नग्राफ़ी विरोधी विधेयक का मसौदा तैयार करने वाली संसदीय समिति के प्रमुख बालकन कपलाले ने एक सख़्त क़ानून की ज़रूरत बताते हुए कहा, "हम धार्मिक माने जाते हैं लेकिन अफ़सोस की बात है कि अश्लील प्रकाशन के मामले इंडोनेशिया का स्थान स्कैंडनीवियाई देशों और रूस के बाद तीसरा है." उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया में अश्लील प्रकाशन बड़ी मात्रा में और बिना किसी बेरोकटोक उपलब्ध है. क़ानून की आड़
बीबीसी की जकार्ता संवाददाता रचेल हार्वी के अनुसार जकार्ता के मुख्य बाज़ारों, ख़ास कर चाइना टाउन में पोर्नो डीवीडी खुलेआम उपलब्ध हैं. लेकिन प्रस्तावित विधेयक के विरोध में भी स्वर उठने पर किसी को आश्चर्य नहीं है. दरअसल प्रस्तावित विधेयक में ऐसी व्यवस्था होगी कि शरीर के उत्तेजक माने जाने वाले हिस्सों को प्रदर्शित करना भी अपराध की श्रेणी में आ जाएगा और दोषी पाए गए व्यक्ति को दो साल की जेल की सजा सुनाई जा सकेगी. विधेयक के विरोधियों का कहना है कि इसके पारित होने के बाद नाभी, कूल्हे या जंघा के प्रदर्शन के नाम पर भी किसी के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की जा सकेगी. महिला अधिकारवादी कार्यकर्ता हुसना मुलया के अनुसार पोर्नोग्राफ़ी के बहाने धार्मिक कट्टरपंथी शरिया क़ानून लागू करना चाहते हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें ओलंपिक समिति की भिड़ंत 'प्लेबॉय' से21 अगस्त, 2004 | खेल प्लेबॉय की नई पेशकश18 जुलाई, 2002 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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