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शुक्रवार, 13 जनवरी, 2006 को 09:47 GMT तक के समाचार
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हज यात्री खोज रहे हैं दोस्तों, रिश्तेदारों को
हज
शैतान को पत्थर मारने की रस्म के दौरान भगदड़ मची
सऊदी अरब में हज के दौरान मची भगदड़ के एक दिन बाद भी यात्री अपने लापता दोस्तों और रिश्तेदारों को खोज रहे हैं. गुरुवार को वहाँ 362 हज यात्री मारे गए थे और सैकड़ों घायल हुए थे.

इस भगदड़ में मारे जाने वालों में 30 भारतीय और 35 पाकिस्तानी नागरिक थे.

सऊदी अरब के अधिकारियों के अनुसार वहाँ शैतान को पत्थर मारने की रस्म के दौरान ये हादसा हुआ.

अधिकारियों ने कहा है कि यात्रियों की लापरवाही के कारण ये हादसा हुआ क्योंकि कुछ यात्री अपना सामान भी अपने साथ लेकर ये रस्म अदा करने पहुँचे थे और जब भगदड़ मची तो अनेक लोग सामान के ऊपर गिरते चले गए.

लेकिन बीबीसी संवाददाता का कहना है कि प्रशासन ने पर्याप्त सुरक्षा इंतज़ाम नहीं किए थे. फ़िलहाल मृतकों की पहचान की जा रही है और पता लगाया जा रहा है कि अधिकतर लोग किस देश से थे.

सऊदी अरब के अधिकारियों ने उन रिपोर्टों का खंडन किया है जिनमें कहा गया था कि प्रशासन भगडड़ रोकने के लिए और कदम उठा सकता था.

मृतकों में 30 भारत और 35 पाकिस्तान से थे

उल्टा गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता का कहना है कि भीड़ पर काबू पाने की और कोशिश की जाती तो इससे भी ज़्यादा लोगों की मौत हो सकती थी.

'सबसे बड़ा हादसा'

लेकिन इस बार हुआ हादसा पिछले 16 वर्षों में सबसे बड़ा हादसा है. वर्ष 2004 में यहीं भगदड़ मची थी जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था को और दुरुस्त किया गया था और अवरोधक लगाए गए थे.

वर्ष 2004 में शैतान को पत्थर मारते समय 200 हज यात्री मारे गए थे. जबकि इसी साल हज यात्रा के शुरू में मक्का में एक होटल की इमारत गिरने के कारण 70 लोगों की मौत हो गई थी.

भगदड़ जमारात पुल के नीचे हुई जहाँ से हज यात्री शैतान को पत्थर मार रहे थे. सऊदी अरब के स्वास्थ्य मंत्री हमाद बिन अब्दुल्ला अल माने के अनुसार कम से कम 289 लोग घायल हुए हैं.

जद्दाह में भारतीयों के लिए उपयोगी टेलीफ़ोन नंबर
00966-500049120
00966-2-6520084
00966-2-5523816
00966-2- 5592528
00966-2- 5523815

जद्दाह स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास के हवाले से कहा गया है कि इस भगदड़ में कम से कम 30 भारतीय हज यात्रियों की मौत हुई है और 13 घायल हुए.

मीना के अस्पताल में घायलों का इलाज चल रहा है लेकिन घायलों की संख्या को देखते हुए कई घायलों को मक्का और रियाद के अस्पतालों में भी भर्ती कराया गया है.

अनुमान लगाया गया है कि इस साल हज यात्रा के लिए 20 लाख लोग आए और
मारे गए हज यात्रियों में ज़्यादातर दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया से थे.

मौक़े पर मौजूद अब्दुल्ला पुलिग ने बताया, "सभी लोग धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे. लेकिन तभी मैंने लोगों के चीखने-चिल्लाने और रोने की आवाज़ सुनी. मैंने देखा कि लोग एक-दूसरे पर गिर रहे थे."

हादसे के बाद एम्बुलेंस और पुलिस की गाड़ी वहाँ पहुँच गई और पुलिस वहाँ से लोगों को निकालने लगी.

हज के दौरान शैतान को पत्थर मारने की परंपरा के दौरान हज यात्रियों में होड़ लगी रहती है कि पत्थर निशाने पर लगे और कई बार कमज़ोर लोग गिर जाते हैं.

हज इस्लाम के पाँच स्तंभों में से एक माना जाता है और प्रत्येक मुसलमान अपने जीवन में एक बार हज करने की इच्छा रखता है.

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